
लखनऊ। हाल के दिनों में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सका। इसके बाद संसद का यह मुद्दा अब सड़क पर भी राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष परिसीमन को लेकर सरकार को घेरने में लगा है। सदन के बाहर विपक्षी दल सत्तापक्ष के आक्रामक रुख के चलते रक्षात्मक नजर आ रहे हैं। बता दें कि पिछले लगभग नौ वर्षों से सत्ता में रही बीजेपी अक्सर विपक्ष के हमलों का जवाब रक्षात्मक अंदाज में देती रही, लेकिन इस बार रणनीति बदलती दिख रही है।
वहीं सूबे की राजधानी लखनऊ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के खिलाफ जन आक्रोश यात्रा निकाली। चिलचिलाती धूप में निकली इस पदयात्रा के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी को 2027 में विपक्ष बनने की बात कही। हालांकि यूपी की राजनीति में पहली बार आधी आबादी का मुद्दा चुनाव से पहले विपक्ष के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। वहीं बीजेपी इसे अपने रिटर्न अटैक के तौर पर इस्तेमाल करते हुए विपक्ष के खिलाफ नया नैरेटिव गढ़ने में जुट गई है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी महिला मतदाताओं को साधने के लिए हर स्तर पर सक्रिय हो गई है। कानून-व्यवस्था, एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिला सुरक्षा से जुड़े कड़े कदमों ने महिला मतदाताओं के बीच सरकार की छवि को मजबूत किया है।
गौरतलब है कि साल 2022 के चुनाव में प्रियंका गांधी ने ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के तहत 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की घोषणा की थी, लेकिन इसका चुनावी फायदा कांग्रेस को नहीं मिला। अब महिला आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों के विरोध ने विपक्ष को नए संकट में डाल दिया है। वहीं लोकसभा चुनाव 2024 में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरणों के जरिए विपक्ष ने बीजेपी को बैकफुट पर धकेल दिया था। राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दों के बावजूद भाजपा अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक अवसर बनकर उभरा है। पार्टी अब इसे आधार बनाकर विपक्ष के जातीय समीकरणों की काट तैयार करने की कोशिश में है।
जमीन पर उतरी भाजपा, महिला वोट बैंक पर फोकस
साल 2024 में 400 पार का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह जमीन पर सक्रिय नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी तक, सभी नेता सीधे जनता के बीच पहुंच रहे हैं। महिला आरक्षण विधेयक को भारतीय जनता पार्टी अब एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, ताकि विपक्ष को घेरा जा सके और महिला वोट बैंक को अपने पक्ष में मजबूत किया जा सके। सीएम योगी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे में भी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष खासकर ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि था मां-माटी-मानुष की बात करने वाली सरकार ने संसद में महिलाओं के साथ धोखा किया।

विपक्ष के सामने बड़ी चुनौती
इन दिनों महिला आरक्षण को लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, उससे विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पीएम मोदी ने संसद में संकेत दिया था कि यदि विपक्ष इस विधेयक का विरोध करेगा तो इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा। अब यही रणनीति जमीन पर उतारी जा रही है। तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष खासकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस पूरे मुद्दे पर लगातार सफाई देते नजर आ रहे हैं। विपक्ष के सामने सबसे बड़ा खतरा आरक्षण विरोधी छवि बनने का है। एक ऐसा नैरेटिव जिसे अब तक वह भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा था, लेकिन अब वही उस पर भारी पड़ता दिख रहा है।

पूर्व भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी महिला सशक्तीकरण के लिए विधेयक लाए थे। हालांकि विपक्ष ने महिला विरोधी मानसिकता के चलते इसे रोकने का काम किया। महिलाएं एकजुट होकर विपक्ष को अपनी ताकत का एहसास कराएं। तो वहीं महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि विधेयक को गिराने के वक्त संसद में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सपा सांसद डिम्पल यादव भी बैठी थीं। विपक्ष की महिला सांसदों ने टेबल थपथपा कर खुशी जाहिर की थी, जबकि उन्हें दुखी होना चाहिए था। वहीं शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि सपा और कांग्रेस पर तीखी प्रक्रिया दी है।