2027 तक संरक्षित स्मारकों की संख्या 300 करने का लक्ष्य, 41 नए स्थलों को संरक्षण की तैयारी

लखनऊ, 28 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर गंभीर है और वर्ष 2027 तक संरक्षित स्मारकों की संख्या 300 तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा 41 नए ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित किए जाने की योजना है, जिनमें से 39 स्थलों को स्वीकृति भी मिल चुकी है।
पर्यटन भवन के सभागार में आयोजित उ0प्र0 राज्य पुरातत्व सलाहकार समिति की उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि वर्तमान में विभाग के अधीन 278 स्मारक संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशन में इस संख्या को बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।
उन्होंने बताया कि चिन्हित स्थलों में प्राचीन मंदिर, टीले, ऐतिहासिक इमारतें और पुरातात्विक स्थल शामिल हैं, जिनमें कई स्थल लगभग 2500 से 3000 वर्ष पुराने हैं। कुछ स्थल उत्तरी कृष्ण मार्जित मृदभांड काल से संबंधित हैं। प्रमुख स्थलों में राजधानी का मूसा बाग, कानपुर नगर का पंचमुखी मंदिर, हरदोई का नागेश्वर मंदिर, उन्नाव का महेपासी टीला, झांसी का गोंडवानी मंदिर, रामपुर का तूती का मकबरा, वाराणसी का शिव मंदिर और महोबा का बासुदेव मंदिर शामिल हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि कुषाण काल से जुड़े स्थलों को आपस में जोड़कर एक “कुषाण ट्रेल” विकसित करने की योजना है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएंगी।
बैठक में प्रमुख सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य ने भी विरासत स्थलों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इन स्थलों को विकसित कर पुस्तकालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर पुरातत्व निदेशक रेनू द्विवेदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।