
लखनऊ। लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में शनिवार को “एडवांसेज़ इन पेन मेडिसिन” विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर का सीएमई कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने क्रॉनिक पेन के आधुनिक, वैज्ञानिक और उन्नत उपचारों पर विस्तार से चर्चा की। यह आयोजन संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह के संरक्षण में संपन्न हुआ। वहीं कार्यक्रम में डीन प्रो. प्रद्युमन सिंह, सीएमएस प्रो. विक्रम सिंह और रजिस्ट्रार प्रो. सुब्रत चंद्र की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मेजर पंकज सुरंगे शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय फैकल्टी के रूप में डॉ. सिद्धार्थ वर्मा एवं डॉ. संजोग माकेवर ने अपने विचार साझा किए।
इस दौरान विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि क्रॉनिक पेन आज वैश्विक स्तर पर एक गंभीर नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के रूप में उभर रहा है और लगभग 20 प्रतिशत वयस्क इससे प्रभावित हैं। सीएमई में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पेन मेडिसिन का क्षेत्र तेजी से प्रिसिजन-आधारित और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे मरीजों को शीघ्र राहत, बेहतर कार्यक्षमता और दवाओं पर निर्भरता में कमी मिल रही है।
स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेशन और वर्टिब्रोप्लास्टी जैसी तकनीकों पर चर्चा
वैज्ञानिक सत्रों में न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीकों, विशेषकर स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेशन, को फेल्ड बैक सर्जरी सिंड्रोम एवं न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार में प्रभावी बताया गया। इसके अलावा वर्टिब्रोप्लास्टी और बैलून काइफोप्लास्टी जैसी वर्टिब्रल ऑगमेंटेशन तकनीकों को ऑस्टियोपोरोसिस एवं कैंसर से संबंधित वर्टिब्रल फ्रैक्चर में अत्यंत लाभकारी बताया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि इन तकनीकों से मरीजों को त्वरित दर्द राहत, शीघ्र गतिशीलता और रीढ़ की संरचना में आंशिक सुधार प्राप्त होता है। कार्यक्रम में रेडियोफ्रीक्वेंसी उपचार, स्पाइन एंडोस्कोपी, इंट्राथीकल पंप तथा अन्य उन्नत मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशंस तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही पेन बायोलॉजिकल और रिजनरेटिव थेरेपी को भी भविष्य की महत्वपूर्ण उपचार पद्धति बताया गया।
आरएमएल में उपलब्ध हैं उन्नत पेन मेडिसिन सेवाएं
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पेन मेडिसिन यूनिट में अब ये सभी आधुनिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को सुलभ एवं प्रमाण-आधारित उपचार मिल रहा है। यह सीएमई इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन के सहयोग से आयोजित किया गया, जो देश में पेन मेडिसिन के क्षेत्र की अग्रणी संस्था मानी जाती है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि संस्थान के पेन फिजिशियन एवं एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर प्रो. अनुराग अग्रवाल वर्तमान में ISSP के राष्ट्रीय सचिव हैं।
पेन मेडिसिन में डीएम और एफएनबी कोर्स की तैयारी
आयोजन अध्यक्ष एवं एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. पीके दास ने बताया कि संस्थान ने पेन मेडिसिन में डीएम कोर्स प्रारंभ करने के लिए आवेदन किया है। वहीं आयोजन सचिव एवं पेन मेडिसिन यूनिट की प्रभारी प्रो. शिवानी रस्तोगी ने कहा कि संस्थान में उपलब्ध उन्नत सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को उच्चस्तरीय उपचार और प्रशिक्षण दोनों उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उत्तर भारत में पेन मेडिसिन प्रशिक्षण की नई पहल
कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि इस वर्ष संस्थान में पेन मेडिसिन में फेलो ऑफ नेशनल बोर्ड के दो प्रशिक्षुओं का स्वागत किया जाएगा। इसे उत्तर भारत के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में इस प्रकार की अग्रणी पहल माना जा रहा है। संस्थान पेन मेडिसिन में प्रशिक्षण और अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी कर रहा है।
कार्यक्रम की सफलता में प्रो. दिनकर कुलश्रेष्ठ, डॉ. सुजीत गौतम, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. देवेंद्र सिंह सहित पीडीसीसी पेन मेडिसिन के पूर्व फेलोज-डॉ. ब्रहस्पति तिवारी, डॉ. शुभेंदु सिंह, डॉ. प्रतिभा यादव एवं डॉ. अलीमका महत्वपूर्ण योगदान रहा।