महाराणा प्रताप जयंती पर अखिलेश यादव का बड़ा सियासी संदेश, क्षत्रिय और ब्राह्मण वोट बैंक साधने की कोशिश


लखनऊ में महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कई बड़े राजनीतिक संकेत दिए। प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो क्षत्रिय समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने टिकट वितरण में भी क्षत्रिय समाज को पर्याप्त हिस्सेदारी देने का भरोसा दिलाया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बंगाल चुनाव नतीजों के बाद अखिलेश यादव की राजनीति में नया बदलाव दिखाई दे रहा है। प्रेस वार्ता में उन्होंने एक तरफ महाराणा प्रताप जयंती के जरिए क्षत्रिय समाज को साधने का प्रयास किया तो दूसरी ओर “पंडित जी जो कहेंगे वही काम होगा” कहकर ब्राह्मण मतदाताओं को भी संदेश देने की कोशिश की। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी अब पारंपरिक वोट बैंक के साथ सवर्ण वर्गों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी समाजवादी नहीं बल्कि “कैपिटलिस्ट और कम्युनिस्ट पार्टी” बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी केवल मंचों पर जयप्रकाश नारायण की तस्वीर लगाकर दिखावा करती है जबकि उनके विचारों पर काम नहीं करती।
महंगाई और आर्थिक मुद्दों पर भी अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कहा कि जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना था कि ऑयल कंपनियों का घाटा आम लोगों से वसूला जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने पलासियो मॉल और किसान बाजार को बेचने का आरोप लगाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
विकास कार्यों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि एक्सप्रेसवे का ईपीसी मॉडल समाजवादी सरकार की देन है और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन भी सपा सरकार के समय हुआ। उन्होंने नोएडा एयरपोर्ट को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि एयरपोर्ट शुरू हो गया लेकिन फ्लाइटें अब भी लखनऊ लाई जा रही हैं।
स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर उन्होंने महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाएं स्मार्ट मीटर उखाड़कर फेंक रही हैं और यदि स्मार्ट मीटर हैक हो सकता है तो फिर ईवीएम पर सवाल उठाना गलत नहीं है। उन्होंने एक बार फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई।
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर किसानों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही कम मुआवजा पाने वाले किसानों से कानूनी मदद लेने की अपील भी की। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि बिना अनुमति किसी सरकारी कार्यालय पर न जाएं।
इस बीच रामजी लाल सुमन के बयान और करणी सेना के विरोध के बाद महाराणा प्रताप को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। ऐसे में अखिलेश यादव की यह प्रेस वार्ता आगामी चुनावों से पहले नए सामाजिक समीकरण बनाने की बड़ी कोशिश के रूप में देखी जा रही है।