
चंडीगढ़, 18 मई: मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 10 प्रमुख औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी गई। इन नीतियों का उद्देश्य संकल्प पत्र तथा बजट घोषणाओं को प्रभावी रूप से लागू करते हुए विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित उद्योगों तथा कृषि आधारित आर्थिक विकास को व्यापक बढ़ावा देना है।
नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दो दिनों तक उद्योगपतियों एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ विस्तृत विचार विमर्श किया. सभी नीतियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ एवं ‘मेक इन इंडिया’ के विजन के अनुरूप तैयार की गई हैं।
1. मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति एचईईपी 2020 का स्थान लेगी और यह प्रदेश की मुख्य औद्योगिक नीति होगी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश, 10 लाख नए रोजगार और प्रदेश के निर्यात को बढ़ाने के लक्ष्य पर फोकस किया गया है। नई नीति में पुरानी ए, बी, सी और डी ब्लॉक आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को समाप्त कर कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम और प्राइम/फोकस क्षेत्र आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है। इस नीति के माध्यम से अब औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदेश के हर ब्लॉक तक पहुंचेंगे और जिन क्षेत्रों में उद्योगों की अधिक आवश्यकता है, उन्हें अधिक लाभ मिलेगा।
2. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों की नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा निर्माण और सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगी।
इसका उद्देश्य हरियाणा को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। यह नीति भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप है।
3. हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र के लिए नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार फार्मा, चिकित्सा उपकरणों, क्लीनिकल ट्रायल, जैव-समतुल्यता अध्ययन और स्वास्थ्य विनिर्माण से जुड़े निवेश को बढ़ावा देगी।
कोविड महामारी के बाद दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई है। यह नीति आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और आयात निर्भरता कम करने की राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा का महत्वपूर्ण योगदान है।
नीति में महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य करने की अनुमति, पात्र इकाइयों को आवश्यक सेवा का दर्जा और पहले से स्वीकृत दवा फॉर्मूलेशन के लिए त्वरित मंजूरी जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।
4. हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार खिलौना और खेल उपकरण क्षेत्र में विनिर्माण, निर्यात, डिजाइन, नवाचार और एमएसएमई भागीदारी को बढ़ावा देगी।
5. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति तैयार करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार ई-वेस्ट संग्रहण, अलगाव, पुनर्चक्रण, प्रमाणन और औपचारिक रीसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करेगी, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया जा सके।
यह नीति भारत सरकार के चक्रीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों, ई-वेस्ट प्रबंधन नियम 2022 और सतत औद्योगिक विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ई-वेस्ट भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में हर वर्ष लगभग 17.5 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में चला जाता है। इस नीति के माध्यम से हरियाणा इस चुनौती को अवसर में बदलना चाहता है।
6. हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति सितंबर 2025 में स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के लिए फायदेमंद है। इसके तहत गुरुग्राम और हरियाणा को विश्व की वैश्विक क्षमता केंद्र राजधानी बनाने के लिए समर्पित नीति तैयार करने की प्रतिबद्धता दर्शाई गई है.
भारत में लगभग 1,700 वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें करीब 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा में पहले से 270 से अधिक ऐसे केंद्र मौजूद हैं। नई नीति के माध्यम से अगले 100 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
7. हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय एआई मिशन और राज्य में उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इसके माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी सक्षम सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और बैंडविड्थ आधारित सेवाओं में निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित किया जाएगा।
8. हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में एवीजीसी-एक्सआर नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों में स्टूडियो, सामग्री निर्माण, बौद्धिक संपदा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी।
9. न्यू हरियाणा डेटा सेंटर नीति 2026
इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5जी सेवाओं और डिजिटल शासन के लिए जरूरी डेटा अवसंरचना को मजबूत करेगी। आज हर डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमता मॉडल और सरकारी डिजिटल सेवा डेटा अवसंरचना पर निर्भर है। हरियाणा की राष्ट्रीय राजधानी से निकटता, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, 500 प्रतिशत तक फ्लोर एरिया रेश्यो में छूट, दोहरी ग्रिड आपूर्ति और आवश्यक सेवा का दर्जा डेटा सेंटर निवेशकों को आकर्षित करेगा।
10. हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026
हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026 को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। सरकार का उद्देश्य है किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ाना है।
नीति के तहत राज्य में फूड प्रोसेसिंग इकाइयों, कोल्ड चेन अवसंरचना, फूड पार्क, पैकेजिंग इकाइयों, फूड टेस्टिंग लैब और इन्क्यूबेशन सेंटरों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों, एफपीओ, प्रोसेसिंग इकाइयों और बाजारों के बीच मजबूत संपर्क बनेगा। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
11. पहली 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था
एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति को छोड़कर अन्य 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 वर्षों तक प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक रोजगार सृजन सब्सिडी मिलेगी। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति करने वाली इकाइयों को पांच वर्षों तक नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों के ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
इन नीतियों की विशेषता केवल प्रोत्साहनों में नहीं, बल्कि इनके पीछे की समग्र सोच में है। सेमीकंडक्टर से लेकर रचनात्मक उद्योगों तक, जीवनरक्षक दवाओं से लेकर हरित रीसाइक्लिंग तक, डिजिटल अवसंरचना से लेकर कृषि आधारित उद्योगों तक, ये नीतियां आधुनिक हरियाणा की नई औद्योगिक दिशा तय करेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा निवेश, रोजगार, निर्यात, नवाचार और ग्रामीण समृद्धि के अगले चरण में देश का अग्रणी राज्य बने और प्रधानमंत्री के विकसित भारत- 2047 का सिरमौर बने।