भूख हड़ताल के पांचवें दिन बिगड़ी मृतक बिजली कर्मी की मां की तबीयत, जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती

किरावली (आगरा)। मृतक बिजली कर्मी रवि सोलंकी के परिवार द्वारा न्याय और अधिकारों की मांग को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन के बीच भूख हड़ताल के पांचवें दिन उनकी 72 वर्षीय मां प्रभा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर प्रशासन ने उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
रवि सोलंकी के परिवार का धरना 205वें दिन भी जारी रहा। परिवार का आरोप है कि विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए आश्वासनों को अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसी के विरोध में प्रभा देवी 30 मई से बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठी हुई थीं।
परिजनों के अनुसार 38 वर्षीय पेट्रोलमैन रवि सोलंकी पिछले लगभग 20 वर्षों से विद्युत विभाग में कार्यरत थे। आरोप है कि 9 अप्रैल 2025 को शटडाउन के दौरान तहसील किरावली के सामने ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते समय लाइन में अचानक करंट आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए थे। उपचार के दौरान 15 अप्रैल 2025 को एक निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी।
परिवार का कहना है कि घटना के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों ने 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, इलाज का पूरा खर्च, पत्नी एवं बच्चों के लिए पेंशन तथा एक आश्रित को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया था। हालांकि अब तक केवल 7.50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि तथा जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से हाल ही में 3 लाख 23 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता ही मिल सकी है।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि वे पिछले कई महीनों से न्याय के लिए विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी के चलते मृतक की मां प्रभा देवी, पुत्रवधू रजनी देवी और तीन नाती-नातिन 12 नवंबर से तहसील सदर परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।
किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में मौन हैं। उनका आरोप है कि न तो परिवार को घोषित आर्थिक सहायता पूरी मिली है और न ही घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी या विभागीय कार्रवाई की गई है।
धरना स्थल पर प्रदीप राणा, पवन सिंह चाहर, सुरेंद्र सोलंकी, बाबूलाल, अरविंद कुमार, भगवान सिंह, राजकिशोर, शशि, रजनी देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे और परिवार की मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।