Loc में धमाके से दो जवान शहीद, पाक-भारत सीमा पर तनाव बढ़ा, क्या अब भारतीय सेना का चलेगा ऑपरेशन सिंदूर 2.0 ?

उरी के कमलकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास हुए धमाके में भारतीय सेना के दो जवान बलिदान हो गए। दोनों को गंभीर हालत में श्रीनगर के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उरी कमलकोट धमाका
जम्मू-कश्मीर उरी कमलकोट धमाका

नई दिल्ली/अमर भारती। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास मंगलवार देर शाम हुए एक धमाके में भारतीय सेना के दो जवानों के बलिदान होने की खबर सामने आई है। घटना उरी के संवेदनशील कमलकोट क्षेत्र में हुई, जो लंबे समय से सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हादसे के बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है।

कमलकोट सेक्टर में कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, LoC के निकट गश्त और निगरानी गतिविधियों के दौरान अचानक हुए विस्फोट में दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल सैन्य चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और बाद में बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर स्थित बादामीबाग के 92 बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद दोनों जवानों को बचाया नहीं जा सका।

इलाज के दौरान दोनों जवानों ने तोड़ा दम

बलिदानी जवानों की पहचान महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित ऐरोली निवासी चव्हाण विक्रम बालकृष्ण तथा महाराष्ट्र के सतारा जिले की कराड तहसील के शाहपुर गांव निवासी अर्जुन जाधव राजेंद्र के रूप में हुई है। दोनों जवानों के निधन की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांवों और परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भी शोक व्यक्त करते हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

महाराष्ट्र के रहने वाले थे दोनों बलिदानी सैनिक

हालांकि सेना की ओर से अभी तक विस्फोट के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रण रेखा के आसपास तैनात जवानों को अक्सर बारूदी सुरंगों, पुराने विस्फोटकों और घुसपैठ से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उरी और कमलकोट क्षेत्र पहले भी घुसपैठ की कोशिशों तथा सीमा पार गतिविधियों के कारण चर्चा में रहे हैं। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने इसी क्षेत्र में कई घुसपैठ प्रयासों को विफल किया था।

उरी सेक्टर क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?

घटना के बाद सेना ने इलाके में तलाशी और जांच अभियान तेज कर दिया है। विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोट किसी पुरानी बारूदी सुरंग, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) या अन्य कारणों से हुआ। देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले दोनों जवानों को सेना की ओर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके बलिदान ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सीमाओं की सुरक्षा में तैनात सैनिक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए निरंतर तत्पर रहते हैं।

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