लखनऊ अग्निकांड: चीखों से दहल उठा अलीगंज, 15 मौतों की पुष्टि; पीएम मोदी, राष्ट्रपति और सीएम योगी ने जताया शोक, बड़े एक्शन की तैयारी

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया क्षेत्र में रविवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश ही नहीं, देश को भी झकझोर कर रख दिया। एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर और लाइब्रेरी के रूप में संचालित बहुमंजिला भवन में लगी आग में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। मृतकों में अधिकांश छात्र-छात्राएं बताए जा रहे हैं, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और लपटों से घिर गई। नीचे के हिस्से में आग फैलने के कारण ऊपर मौजूद छात्रों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। बताया जा रहा है कि छत पर जाने वाले गेट पर ताला लगा था, जबकि सीढ़ियों तक आग पहुंच चुकी थी। ऐसे में कई छात्रों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों, छज्जों और बिजली के केबलों का सहारा लिया। कुछ छात्र ऊपर से कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव दल को अंदर फंसे छात्रों तक पहुंचने के लिए इमारत की दीवार तक तोड़नी पड़ी। घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद घायलों को बाहर निकालकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। केजीएमयू प्रशासन के अनुसार 22 से अधिक लोगों को अस्पताल लाया गया, जिनमें 15 को मृत घोषित किया गया, जबकि कई घायलों का उपचार जारी है।

भावुक हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

घटनास्थल और अस्पताल पहुंचने वाले उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से कई शव देखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है।

पीएम मोदी ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हादसा अत्यंत दुखद है और केंद्र सरकार हरसंभव मदद के लिए तैयार है।

राष्ट्रपति और राहुल गांधी ने भी जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

अलीगढ़ दौरा छोड़कर लौटे सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे की जानकारी मिलते ही अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़ दिया और तत्काल लखनऊ लौट आए। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और बाद में केजीएमयू पहुंचकर घायलों व उनके परिजनों से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायता राशि तत्काल वितरित की जाए और घायलों के इलाज में कोई कमी न छोड़ी जाए।

जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज

हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, अग्निकांड को लेकर अलीगंज थाने में तहरीर दी गई है और मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। संस्थान और भवन प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्रशासनिक और फायर विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है।

उठ रहे बड़े सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। अब पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों, लाइब्रेरी और व्यावसायिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक जांच की मांग तेज हो गई है।

लखनऊ का यह अग्निकांड हाल के वर्षों की सबसे भयावह घटनाओं में शामिल हो गया है। पूरे प्रदेश में शोक का माहौल है और हर किसी की निगाह अब जांच रिपोर्ट तथा दोषियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।