अल-नीनो की चुनौती से निपटने को यूपी सरकार सतर्क, खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यापक रणनीति

लखनऊ। अल नीनो की संभावित परिस्थितियों और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा तथा खेती-किसानी पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में कृषि भवन, लखनऊ से प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित इस बैठक में देश के सभी राज्यों के कृषि मंत्री और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जुड़े। बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून की अनिश्चित परिस्थितियों के बावजूद जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर खरीफ उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखना था।

बैठक में बताया गया कि खरीफ फसलों की बुआई मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर रहती है और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए राज्यों को अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर ने राज्य कृषि विभागों के सहयोग से जिला स्तर तक इमरजेंसी कृषि योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि बारिश देर से हो या अपेक्षा से कम हो, तब भी किसानों को न्यूनतम नुकसान हो। इसके लिए सूखा सहनशील बीजों के उपयोग को बढ़ावा देने और कम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि विलंबित मानसून की स्थिति में भी फसल चक्र प्रभावित न हो और उत्पादन सुरक्षित रह सके।

जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने के निर्देश

बैठक में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसानों को मेंड़बंदी, सूक्ष्म सिंचाई और अन्य जल बचत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी दी जाए जिससे उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके। साथ ही खेतों में पानी के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

दलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य, सिंचाई सुविधाओं को और मजबूत बनाने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उड़द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलों के लिए कुल 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नहरों को उनकी पूर्ण क्षमता से संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेश में पहले से 16 लाख निजी नलकूप कार्यरत हैं, जबकि किसानों के लिए 91,260 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। सोलर पंप लगाने वाली कंपनियों को प्रत्येक जनपद में कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान इन उपकरणों का बेहतर संचालन और रखरखाव कर सकें।

खेत तालाब और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर, डीएसआर विधि से धान की बुआई की सलाह

जल संरक्षण को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए खेत तालाब योजना के लक्ष्य को बढ़ाने तथा प्रत्येक जनपद में कृषि विभाग के कार्यालयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं धान उत्पादक किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) विधि से बुआई करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से पानी की खपत कम होती है और श्रम लागत में भी कमी आती है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।

फसल बीमा योजना से अधिकाधिक किसानों को जोड़ने पर बल

बैठक में किसानों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम की स्थिति में किसानों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए बीमा कवरेज का दायरा बढ़ाया जाए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की सभी सलाहों तथा योजनाओं की जानकारी ब्लॉक और ग्राम स्तर तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि किसान आत्मविश्वास के साथ खेती कर सकें।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कृषि भवन सभागार में आयोजित इस बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, अपर निदेशक कृषि रक्षा आशुतोष मिश्र, संयुक्त निदेशक ब्यूरो अखिलेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक उर्वरक हरेंद्र मिश्र सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।