
टिकैतनगर (बाराबंकी)। विकास खंड पूरेडलई के अंतर्गत आदर्श नगर पंचायत टिकैतनगर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब चार वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से निर्मित अंत्येष्टि स्थल आज तक आम लोगों के किसी काम नहीं आ सका। वजह यह है कि जिस स्थान पर इसका निर्माण कराया गया, वहां तक पहुंचने के लिए कोई सार्वजनिक रास्ता ही उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पहुंच मार्ग सुनिश्चित किए निर्माण कराकर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया गया है। अब यह अंत्येष्टि स्थल उपयोग के बजाय उपेक्षा और बदइंतजामी की मिसाल बनकर रह गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, जब अंत्येष्टि स्थल के निर्माण की योजना बनाई गई थी, तभी यह तथ्य सभी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में था कि चयनित भूमि तक पहुंचने के लिए कोई सार्वजनिक मार्ग नहीं है। इसके बावजूद न तो रास्ते की व्यवस्था कराई गई और न ही भूमि संबंधी विवादों का समाधान किया गया। सीधे निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया और लाखों रुपये खर्च कर भवन व अन्य सुविधाएं तैयार कर दी गईं।
वर्तमान स्थिति यह है कि अंत्येष्टि स्थल चारों ओर से निजी कृषि भूमि से घिरा हुआ है। खेत मालिक अपने खेतों से शव ले जाने के लिए रास्ता देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजन इस अंत्येष्टि स्थल का उपयोग नहीं कर पाते। मजबूरी में उन्हें दूसरे स्थानों पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब अंतिम संस्कार स्थल तक शव ही नहीं पहुंच सकता, तो ऐसे निर्माण का औचित्य क्या रह जाता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं में पहले मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। यदि पहले सार्वजनिक मार्ग बनाया जाता और उसके बाद अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया जाता, तो यह सुविधा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए उपयोगी साबित होती। लेकिन बिना योजना और बिना दूरदर्शिता के किए गए निर्माण ने सरकारी धन को व्यर्थ कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि चार वर्षों से यह अंत्येष्टि स्थल वीरान पड़ा है। यहां न कोई अंतिम संस्कार होता है और न ही इसकी देखरेख की जाती है। समय के साथ भवन और परिसर भी जर्जर होने लगा है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्माण से पहले न तो स्थलीय निरीक्षण किया और न ही यह देखा कि स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था है या नहीं।
क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाए कि बिना पहुंच मार्ग के निर्माण की स्वीकृति किस आधार पर दी गई और किन अधिकारियों की संस्तुति पर सरकारी धन खर्च किया गया। यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
लोगों ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि अंत्येष्टि स्थल तक स्थायी सार्वजनिक मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षों से बेकार पड़ी इस सरकारी संपत्ति का उपयोग शुरू हो सके। उनका कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि योजनाओं का क्रियान्वयन बिना समुचित योजना और जवाबदेही के होगा तो जनता का विश्वास कमजोर होगा।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक अंत्येष्टि स्थल का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच कराई जाए, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए और अंत्येष्टि स्थल तक सार्वजनिक मार्ग बनवाकर इसे आम जनता के उपयोग के योग्य बनाया जाए। तभी लाखों रुपये की सरकारी धनराशि का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा।