पश्चिम बंगाल में जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल का खुलासा? हनी-ट्रैप और साजिश के एंगल की जांच में जुटी एजेंसियां

पश्चिम बंगाल STF की जांच में कथित जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल से जुड़े हनी-ट्रैप, राजनीतिक निशाने और डिजिटल नेटवर्क के एंगल सामने आए हैं। एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल STF की जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल मामले में जांच
पश्चिम बंगाल में कथित आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियां

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक मॉड्यूल की जांच ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में हनी-ट्रैप, डिजिटल नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने जैसी गतिविधियों के संभावित एंगल सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव डालना, संवेदनशील जानकारी हासिल करना या आर्थिक अपराधों को अंजाम देना था।

कथित तौर पर युवा महिलाओं की भर्ती की योजना

जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस मॉड्यूल में कथित रूप से ऐसी युवा महिलाओं को जोड़ने की योजना थी, जिनका इस्तेमाल हनी-ट्रैप जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सके। अधिकारियों का दावा है कि महिलाओं को आर्थिक लाभ का लालच देकर इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, मामले में जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित नेटवर्क का दायरा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित था या इसके तार अन्य राज्यों तक भी जुड़े हुए थे।

राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाने के आरोप

सूत्रों के अनुसार, जांच में यह एंगल भी सामने आया है कि कथित मॉड्यूल राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या किसी राजनीतिक व्यक्ति, मंत्री या उनके परिवार के सदस्यों को निशाना बनाने की कोई योजना थी। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक आतंकी नेटवर्क अब केवल हिंसक घटनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यक्तिगत संपर्कों का इस्तेमाल कर नए तरीके अपनाने की कोशिश करते हैं।

आईएसआई कनेक्शन की भी जांच

जांच एजेंसियां कथित तौर पर इस मामले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या किसी विदेशी नेटवर्क ने इस कथित मॉड्यूल को निर्देश, आर्थिक सहायता या रणनीतिक मदद उपलब्ध कराई थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठन अब पारंपरिक हमलों के अलावा साइबर नेटवर्क, सोशल इंजीनियरिंग और मानव संपर्कों के जरिए गतिविधियां चलाने की कोशिश करते हैं।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी नजर

जांच में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका का एंगल भी सामने आया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी प्रचार अभियान, संपर्क बढ़ाने या संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए किया गया। जांच के दायरे में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल युग में ऑनलाइन पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकता है।

अर्पिता सरकार समेत कई पहलुओं की जांच

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें झारखंड की रहने वाली 22 वर्षीय कथित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अर्पिता सरकार का नाम भी सामने आया है। STF कथित तौर पर उसके डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्कों और यात्रा विवरण की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसकी गतिविधियों का संबंध किसी संगठित नेटवर्क से था।

जंतर-मंतर हिंसा की साजिश के एंगल की पड़ताल

जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या कथित मॉड्यूल किसी बड़े सार्वजनिक स्थान पर अशांति फैलाने की योजना बना रहा था।अधिकारियों के अनुसार, पुलिस वर्दी हासिल करने और प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने जैसी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकी संगठन अब कम जोखिम वाले तरीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं, जिनमें डिजिटल नेटवर्क, सोशल इंजीनियरिंग और मानव संपर्क शामिल हैं। पश्चिम बंगाल STF और अन्य जांच एजेंसियां पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।

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