
संतोष शुक्ला
ब्यूरो चीफ (बाराबंकी)
बाराबंकी। राजनीति में ऐसे जनप्रतिनिधि कम ही देखने को मिलते हैं, जिनकी पहचान केवल सत्ता या पद तक सीमित न रहकर जनता के बीच उनकी सहज उपलब्धता, निरंतर जनसंपर्क और वर्षों की जनसेवा से बनती हो। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री एवं दरियाबाद विधानसभा से लगातार दो बार विधायक रहे सतीश शर्मा का नाम आज बाराबंकी की राजनीति में ऐसे ही नेताओं में लिया जाता है। संगठन में मजबूत पकड़, क्षेत्र में लगातार सक्रियता और आम लोगों के बीच उनकी सुलभ मौजूदगी ने उनके राजनीतिक कद को समय के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में बनी है, जिन्होंने संगठन और जनता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए लगातार जनसेवा को प्राथमिकता दी है।
लगातार दो बार विधायक बनने के बाद मिला राज्य मंत्री का दायित्व
दरियाबाद विधानसभा से लगातार दो बार जनता का विश्वास हासिल करना सतीश शर्मा के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिलना इस बात का संकेत माना गया कि संगठन और शीर्ष नेतृत्व दोनों ने उनकी कार्यशैली, सक्रियता और जनसंपर्क पर भरोसा जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुकाम अचानक नहीं मिला, बल्कि वर्षों तक संगठन के प्रति समर्पण, कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत तालमेल और क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने का परिणाम है। यही वजह है कि उनका राजनीतिक प्रभाव समय के साथ लगातार बढ़ता गया।
राज्य मंत्री बनने के बाद भी जनता के लिए खुले रहते हैं दरवाजे
राज्य मंत्री बनने के बाद भी सतीश शर्मा की सबसे बड़ी पहचान उनकी जनता के बीच सहज उपलब्धता मानी जाती है। उनके आवास पर सुबह से लेकर देर शाम तक फरियादियों का आना-जाना लगा रहता है। किसान, मजदूर, व्यापारी, छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग बिना किसी औपचारिकता या संकोच के अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। जनता दर्शन के माध्यम से वे लोगों की शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने या समस्याओं के समाधान का प्रयास करते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनके यहां किसी परिचय या सिफारिश की आवश्यकता नहीं पड़ती और आम नागरिक भी सीधे अपनी बात रख सकता है। यही सहजता और सादगी उन्हें जनता के बीच एक जनसेवक की पहचान दिलाती है।
सामाजिक सरोकारों में भी निभाते हैं सक्रिय भूमिका
राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी सतीश शर्मा की सक्रियता लगातार देखने को मिलती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में सहयोग, गरीब परिवारों की सहायता, मरीजों के उपचार में मदद, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में सहभागिता, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में उपस्थिति जैसी गतिविधियों के माध्यम से वे समाज के विभिन्न वर्गों से लगातार जुड़े रहते हैं। समाज के हर वर्ग के साथ उनका सीधा संवाद और सहयोग उनकी लोकप्रियता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
संगठन में मजबूत समन्वय और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क
भारतीय जनता पार्टी के संगठन में भी सतीश शर्मा की मजबूत पकड़ की चर्चा अक्सर होती है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ नेतृत्व तक उनके बेहतर समन्वय को उनकी राजनीतिक ताकत माना जाता है। कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में शामिल होना, संगठनात्मक बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाना और चुनावी रणनीतियों में योगदान देना उन्हें पार्टी के भरोसेमंद नेताओं की श्रेणी में स्थापित करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संगठन और क्षेत्र दोनों स्तरों पर उनकी सक्रियता ने उनके नेतृत्व को और मजबूत किया है।
विकास योजनाओं को गति देने पर रहता है विशेष जोर
दरियाबाद विधानसभा के विकास को लेकर भी सतीश शर्मा लगातार सक्रिय नजर आते हैं। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर देते रहे हैं। विकास कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों के साथ समन्वय और क्षेत्रीय दौरे उनकी नियमित कार्यशैली का हिस्सा माने जाते हैं।
युवा, महिला और व्यापारी वर्ग के बीच भी मजबूत स्वीकार्यता
क्षेत्र में युवा, महिला और व्यापारी वर्ग के बीच भी सतीश शर्मा की अच्छी स्वीकार्यता देखने को मिलती है। रोजगार, शिक्षा, खेल, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी उन्हें केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रखती, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ उनका निरंतर संवाद बनाए रखती है। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं मानी जाती।
जनसंपर्क और जनसेवा से मजबूत हुआ राजनीतिक कद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का वास्तविक कद केवल चुनावी जीत से तय नहीं होता, बल्कि जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता और उपलब्धता से निर्धारित होता है। लगातार दो बार विधायक चुने जाना, राज्य मंत्री का दायित्व मिलना और इसके बावजूद आम लोगों के लिए अपने दरवाजे खुले रखना सतीश शर्मा की उसी कार्यशैली को दर्शाता है, जिसमें जनसंपर्क और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। समर्थकों का कहना है कि उनके लिए राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का दायित्व है और यही कारण है कि बाराबंकी की राजनीति में उनका राजनीतिक कद लगातार मजबूत होता जा रहा है।