
लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल को उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधान परिषद सदस्य रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी को भेज दिया है। उनके इस्तीफे के बाद प्रदेश की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि हाल ही में प्रदेश संगठन में किए गए बदलाव और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष को जिला इकाइयों के गठन और संगठन विस्तार की अहम जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, जिसके बाद रामाशीष राय ने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया।
कौन हैं रामाशीष राय
पूर्व एमएलसी रामाशीष राय पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी हैं और लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। करीब दो दशक तक भाजपा में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य भी मनोनीत किया गया था। हालांकि, बाद के वर्षों में अपेक्षित राजनीतिक महत्व और जिम्मेदारियां नहीं मिलने से उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ दिया।
इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल का दामन थामा, जहां पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उन्हें उत्तर प्रदेश रालोद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। अब उनके इस्तीफे को प्रदेश में रालोद के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर पार्टी के संगठन और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।