आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में वर्षायोग के दौरान धार्मिक कार्यक्रम: रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर भी किया गया प्रवचन

लखनऊ। आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के मंदिर में चल रहे वर्षायोग के दौरान गुरुवार को पूज्य उपाध्याय श्री वीहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की और प्रवचन का श्रवण कर जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने का संदेश प्राप्त किया।

अपने प्रवचन में उपाध्याय श्री वीहसंत सागर जी महाराज ने कहा कि आज की पीढ़ी अपने दुख से उतनी दुखी नहीं है, जितनी दूसरों के सुख से दुखी है। व्यक्ति अक्सर यह सोचकर परेशान होता रहता है कि उसका पड़ोसी या आसपास का व्यक्ति इतना सुखी क्यों है। दूसरों के सुख को देखकर वह इस कदर चिंतित हो जाता है कि अपने दुख को भी भूल जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने जीवन, कर्म और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सकारात्मक सोच और संतोष ही जीवन में वास्तविक सुख का आधार है।

उपाध्याय श्री ने कहा, “हर वक्त व्यस्त रहोगे, तभी मस्त रहोगे।” उन्होंने समझाया कि जीवन में परिस्थितियां कभी एक जैसी नहीं रहतीं। सुख और दुख दोनों जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और मनुष्य को हर परिस्थिति में धैर्य एवं संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुरे समय में व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि बुरे वक्त का भी बुरा वक्त आता है और समय के साथ कठिन परिस्थितियां भी समाप्त हो जाती हैं। इसलिए मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

700 मुनियों की रक्षा से जुड़ा है रक्षाबंधन पर्व

रक्षाबंधन पर्व के जैन धर्म में महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपाध्याय श्री वीहसंत सागर जी महाराज ने बताया कि जैन परंपरा में रक्षाबंधन का संबंध विष्णुकुमार मुनिराज द्वारा 700 मुनियों की रक्षा किए जाने की घटना से जुड़ा माना जाता है। कथा के अनुसार राजा बलि के मंत्री ने 700 मुनियों पर संकट खड़ा कर दिया था। उस समय विष्णुकुमार मुनिराज ने अपने तप, संयम और शक्ति के प्रभाव से संकट में पड़े मुनियों की रक्षा की थी।

उन्होंने बताया कि मुनियों की रक्षा की इसी घटना की स्मृति में रक्षाबंधन पर्व मनाने की परंपरा मानी जाती है। जैन परंपरा में यह पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साधु-संतों, धर्म, अहिंसा और मानवता की रक्षा का संदेश भी देता है। रक्षाबंधन का यह स्वरूप समाज को परस्पर सहयोग, करुणा, सुरक्षा और धर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।

70 परिवारों ने मिलकर की मुनिराज के आहार की व्यवस्था

आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में रक्षाबंधन एवं वासुपूज्य भगवान के पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। इस अवसर पर लगभग 70 परिवारों ने मिलकर मुनिराज के लिए आहार की व्यवस्था की। धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कार्यक्रमों में सहभागिता की और धर्मलाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।

कल के कार्यक्रम

रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रातः 9 बजे रक्षाबंधन पर्व पर विशेष प्रवचन होगा। इसके बाद प्रातः 10 बजे आहारचर्या का कार्यक्रम संपन्न होगा। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं से धार्मिक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने की अपील की गई है।