खेल-खिलौनों की उम्र में शब्दों से रची अपनी दुनिया, नाना और शिक्षिकाओं को मानते हैं प्रेरणा

लखनऊ। जिस उम्र में बच्चे खेल-खिलौनों और कार्टून की दुनिया में खोए रहते हैं, उसी उम्र में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), अलीगंज कैंपस-2 की कक्षा 4-B के 9 वर्षीय छात्र मोहम्मद यासीन ने अपनी कल्पनाओं को किताबों का रूप देकर लेखन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर कदम बढ़ाया है। यासीन अब तक तीन पुस्तकें लिख चुके हैं, जो उनकी कल्पनाशक्ति, सृजनात्मक सोच और साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती हैं।

नन्हे लेखक यासीन की पुस्तकों में अलग-अलग विषयों को अपनी कल्पना और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास दिखाई देता है। इतनी कम उम्र में पुस्तक लेखन की ओर उनका रुझान यह बताता है कि बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर मिले तो वे छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

नाना और शिक्षिकाओं से मिली लिखने की प्रेरणा

मोहम्मद यासीन बताते हैं कि उन्हें लेखन के लिए प्रेरणा अपने नाना मोहम्मद सामी उस्मानी तथा अपनी शिक्षिकाओं शिवानी त्रिपाठी मैम और रिचा मैम से मिली। परिवार और शिक्षकों के निरंतर सहयोग एवं प्रोत्साहन ने उन्हें अपनी कल्पनाओं और विचारों को शब्दों में ढालने के लिए प्रेरित किया।

परिवार के सदस्यों और शिक्षकों के अनुसार यासीन बचपन से ही नई चीजों को जानने और अपनी कल्पनाओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने में रुचि रखते हैं। इसी रुचि को उन्होंने लेखन का माध्यम बनाया और धीरे-धीरे अपनी कल्पनाओं को पुस्तकों के रूप में सामने लाने लगे।

बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती है

महज 9 वर्ष की उम्र में तीन पुस्तकें लिखना यासीन की मेहनत, लगन और रचनात्मक क्षमता का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी यह उपलब्धि दूसरे बच्चों को भी किताबें पढ़ने, लिखने और अपनी छिपी हुई रचनात्मक प्रतिभा को पहचानने के लिए प्रेरित कर सकती है।

परिवार और विद्यालय को उम्मीद है कि आने वाले समय में मोहम्मद यासीन अपनी लेखन प्रतिभा को और निखारेंगे और साहित्य के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे। खेल और पढ़ाई के साथ अपनी कल्पनाओं को शब्द देने वाला यह नन्हा लेखक आने वाले दिनों में साहित्य की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।