
सिद्धौर, बाराबंकी। विकासखंड सिद्धौर में ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की दिशा में खंड विकास अधिकारी पूजा सिंह की कार्यशैली क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सक्रियता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए किए जा रहे प्रयासों से विकासखंड की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव की बात ग्रामीणों और कर्मचारियों की ओर से कही जा रही है।
बीडीओ पूजा सिंह का जोर इस बात पर है कि ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध सरकारी संसाधनों का प्रभावी और निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल हो। सड़क, नाली, स्वच्छता, पेयजल, आवास, रोजगार सहित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति पर निगरानी रखने के साथ ही कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
फाइलों से निकलकर धरातल तक पहुंचे विकास
ग्रामीणों का कहना है कि किसी विकासखंड की पहचान केवल योजनाओं और बजट से नहीं, बल्कि उनके धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से होती है। इसी सोच के तहत विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधीनस्थ कर्मचारियों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कराने और किसी तरह की लापरवाही से बचने के निर्देश दिए जाते हैं।
विकासखंड कार्यालय में आने वाले ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के माध्यम से उनके निस्तारण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए कार्यालय स्तर पर संवेदनशील रवैया अपनाया जा रहा है।
मनरेगा और ग्रामीण योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर
मनरेगा सहित ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कार्यों की प्रगति, श्रमिकों को रोजगार और योजनाओं के निर्धारित मानकों के अनुपालन की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ग्रामीणों में सरकारी योजनाओं के प्रति भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस
ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण पहलू है। महिलाओं को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए समूहों की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।
पूजा सिंह की कार्यशैली का एक अहम पहलू यह भी बताया जाता है कि वह केवल कागजी प्रगति पर निर्भर रहने के बजाय विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने को प्राथमिकता देती हैं। गांवों में चल रहे कार्यों की जानकारी लेने और जरूरत के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को दिशा-निर्देश देने से निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश
विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात भी सामने आ रही है। सरकारी धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हो और विकास कार्यों में लापरवाही न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में भी अपने दायित्वों को लेकर सजगता बढ़ने की बात कही जा रही है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी तंत्र ईमानदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ काम करे तो योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकता है। बीडीओ पूजा सिंह की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में हो रही सकारात्मक चर्चा इसी उम्मीद को दर्शाती है।
पारदर्शिता को विकास की बुनियाद मानने की पहल
ग्रामीण विकास केवल सड़क, नाली या अन्य निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। इसके लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। विकासखंड स्तर पर इसी समन्वय को मजबूत करने के साथ ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जा रहा है।
सिद्धौर विकासखंड में बीडीओ पूजा सिंह की सक्रिय और जिम्मेदार कार्यशैली ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि योजनाओं की निगरानी, कार्यों की गुणवत्ता और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का सिलसिला जारी रहता है, तो सिद्धौर विकासखंड ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बेहतर उदाहरण बन सकता है।
कुल मिलाकर, सिद्धौर में बीडीओ पूजा सिंह की कार्यशैली प्रशासनिक जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी सक्रियता और प्रयासों से विकासखंड में विकास कार्यों की रफ्तार आगे भी बनी रहेगी।