
लखनऊ, 22 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से 160 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की हैं। इसमें उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 10.59 करोड़ रुपये से अधिक और गुणवत्तापूर्ण बीज, बीज भंडारण, खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन बीजों से संबंधित मदों के लिए 150 करोड़ रुपये की स्वीकृति शामिल है।
प्रदेश सरकार के अनुसार कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए नवीनतम कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में “इंटरवेंशन ऑफ इम्प्रूव्ड एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजीज फॉर ट्रांसफॉर्मिंग एग्रीकल्चर इन उत्तर प्रदेश फॉर एन्हांसिंग फार्मर्स इनकम” योजना के अंतर्गत अनुदान संख्या-11 में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1059.82 लाख रुपये, यानी करीब 10 करोड़ 59 लाख 82 हजार रुपये, की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में निरंतर वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है।
बीजों के लिए 150 करोड़ रुपये की मंजूरी
कृषि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण और उन्नतशील बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एक और महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किया है। अनुदान संख्या-11 के अंतर्गत बीज आधारित योजनाओं, बीज भंडार, खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन बीजों की लागत आदि मदों के लिए 15000 लाख रुपये यानी 150 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
सरकार का मानना है कि इस वित्तीय प्रावधान से प्रदेश में बीजों की उपलब्धता और भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को फसल की बुवाई के समय उन्नतशील बीज उपलब्ध कराने और बीज वितरण तंत्र को बेहतर बनाने में भी इसका लाभ मिलेगा।
कृषि तकनीक और बीज व्यवस्था पर जोर
उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक और आधुनिक बनाने के लिए सरकार की ओर से तकनीक, बीज और उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नई वित्तीय स्वीकृतियों के जरिए एक ओर आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाया गया है।
सरकार के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य कृषि उत्पादकता में सुधार के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। विशेष रूप से दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए बीज उपलब्धता को बेहतर बनाने से प्रदेश में इन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।