
सिद्धौर। पर्यावरण संरक्षण और नगर क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हरिशंकरी रोपण अभियान के तहत नगर पंचायत सिद्धौर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वार्ड अमहट स्थित अमृत सरोवर और अंत्येष्टि स्थल परिसर में नगर पंचायत चेयरमैन प्रतिनिधि लल्लू रावत तथा नगर पंचायत के लिपिक श्रीश मिश्रा ने पौधरोपण किया। इस दौरान लोगों को पौधों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच पौधरोपण केवल एक अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी से लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है। हरिशंकरी पौधों का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व भी माना जाता है। अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल की जाए तो नगर क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण संतुलन को भी मजबूत किया जा सकता है।
चेयरमैन प्रतिनिधि लल्लू रावत ने कहा कि नगर पंचायत सिद्धौर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण को लगातार बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल और सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नगर पंचायत स्तर पर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ पौधों की देखभाल के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
नगर पंचायत के लिपिक श्रीश मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। केवल सरकारी स्तर पर पौधे लगा देने से अभियान सफल नहीं हो सकता। आम नागरिकों को भी आगे आकर लगाए गए पौधों की देखभाल करनी होगी। उन्होंने लोगों से अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
कार्यक्रम में भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के महत्व पर जोर देते हुए लोगों से अभियान में भागीदारी की अपील की गई।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र के खाली स्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी भी जरूरी है। इससे पौधरोपण अभियान को स्थायी रूप दिया जा सकेगा और लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
हरिशंकरी रोपण अभियान के माध्यम से सिद्धौर में पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नगर क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और पौधों के संरक्षण की भावना विकसित करना रहा।