मेरठ: जिला खनन अधिकारी के आवास से 63 लाख रुपये बरामद, 85 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

मेरठ में विजिलेंस ने जिला खनन अधिकारी सुधाकर सिंह और सहायक लिपिक को 85 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आवास से 63 लाख रुपये मिले।

मेरठ में जिला खनन अधिकारी के आवास पर विजिलेंस की कार्रवाई
मेरठ में जिला खनन अधिकारी के आवास पर विजिलेंस की कार्रवाई

डिजिटल डेस्क, मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान जिला खनन अधिकारी के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का मामला सामने आया है। सामग्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की मेरठ सेक्टर ट्रैप टीम ने जिला खनन अधिकारी सुधाकर सिंह और संविदा कर्मी सहायक लिपिक सद्दाम को 85 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

सरकारी आवास में मिली नकदी

विजिलेंस टीम जब जिला खनन अधिकारी के सरकारी आवास पर पहुंची तो वहां दो अलमारियां मिलीं। एक अलमारी में कपड़ों के साथ नकदी से भरा बैग रखा था। दूसरी छोटी अलमारी में भी नोटों की गड्डियां रखी थीं।

अलमारियों में गुप्त लॉक के साथ बाहर से ताला भी लगा था। तलाशी के दौरान टीम को 200 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियां मिलीं। दूसरी अलमारी से दो बड़े बैग बरामद हुए, जिनमें 500-500 रुपये के नोटों के बंडल बताए गए हैं।

नोटों की गिनती के लिए मंगाई गई मशीन

बरामद नकदी को टीम थाने लेकर पहुंची। नोटों की संख्या अधिक होने के कारण गिनती में परेशानी हुई, जिसके बाद एलडीएम से मशीन मंगाई गई और मशीनों की मदद से नकदी की गिनती की गई। सामग्री के अनुसार, जिला खनन अधिकारी की कार्यालय स्थित दराज से 8 लाख रुपये नकद और उनके सरकारी आवास से 63 लाख रुपये बरामद हुए।

85 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार

विजिलेंस की ट्रैप टीम ने जिला खनन अधिकारी कार्यालय में कार्रवाई की। आरोप है कि सुधाकर सिंह और संविदा कर्मी सहायक लिपिक सद्दाम 85 हजार रुपये की रिश्वत ले रहे थे। इसी दौरान टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। मामले में बरामद नकदी और रिश्वत से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

जांच में नकदी के स्रोत की पड़ताल

कार्रवाई के बाद जांच का अहम हिस्सा बरामद रकम के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल है। उपलब्ध सामग्री में नकदी के स्रोत को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए इस संबंध में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

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