
जौनपुर। मड़ियाहूं। क्षेत्र के ग्राम पंचायत बदौवां में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शुक्रवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया। विवाह उत्सव देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। पूरा पंडाल राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास पंडित राधेश्याम महाराज पराशर ने छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने महारास लीला, कंस वध, गोवर्धन पूजा और द्वारिका लीला के प्रसंगों को विस्तार से समझाया। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं।
गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में अपनी एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक धारण कर ब्रजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा का संदेश प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से भी जुड़ा है। मनुष्य को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पेड़-पौधों, जल और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव रहा। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के स्वरूप में सजे बाल कलाकारों की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और मंगल गीतों के बीच विवाह की रस्में पूरी की गईं। जैसे ही जयमाला का प्रसंग आया, कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर विवाह उत्सव का स्वागत किया।
महिलाओं ने मंगलगीत प्रस्तुत कर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। वहीं कथा स्थल पर भजन-कीर्तन मंडली ने ‘राधे किशोरी दया करो’ सहित विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। देर तक कथा स्थल पर भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा।