
लखनऊ, 29 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब सिर्फ मंदिरों, स्मारकों और होटल तक सीमित नहीं रह गया है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का असर रेस्टोरेंट, कैफे, वाहन किराये, आवास और दूसरी सेवाओं के कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश सरकार अब GST के तहत दर्ज 51 सर्विस कैटेगरी के आंकड़ों के जरिए पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का आकलन कर रही है। मंगलवार को पर्यटन भवन में हुई समीक्षा बैठक में पर्यटन के प्रदेश की ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ के लक्ष्य में योगदान पर चर्चा हुई।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात और डेलॉयट टीम के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में प्रस्तुत विश्लेषण में पर्यटन गतिविधियों और इससे जुड़ी सेवाओं के कारोबार के बीच सकारात्मक संबंध की समीक्षा की गई।
रेस्टोरेंट-कैफे सबसे बड़ा कारोबार वर्ग
वर्ष 2025-26 में आवास, फूड सर्विस और वाहन किराये जैसी श्रेणियों में दर्ज कारोबार की समीक्षा की गई। इसमें रेस्टोरेंट और कैफे सबसे बड़ा कारोबार वर्ग सामने आया। हालांकि GST के ये आंकड़े पर्यटकों के साथ स्थानीय ग्राहकों से होने वाली बिक्री को भी शामिल करते हैं, इसलिए इन्हें पर्यटन से होने वाले कारोबार का अकेला पैमाना नहीं माना जा सकता।
होटल निर्माण में भी तेजी दर्ज की गई है। होटल बिल्डिंग प्लान की मंजूरी 2023-24 में 205 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 299 और 2025-26 में 421 हो गई। वर्ष 2023 से 7 सितंबर 2026 तक होटल, बजट आवास, रिसॉर्ट और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े करीब 44,240 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं।
हर जिले में पर्यटन की अलग तस्वीर खोजने पर जोर
बैठक में पर्यटन स्थलों के आकलन को जिला स्तर तक विस्तार देने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने लखनऊ में पर्यटकों की आवाजाही को ज्यादा बारीकी से समझने और सड़क व हाईवे कनेक्टिविटी में सुधार का पर्यटन पर असर दर्ज करने की जरूरत बताई।
जनवरी से जून 2026 के आंकड़ों में विदेशी पर्यटकों की दृष्टि से आगरा और लखनऊ प्रमुख गंतव्यों के रूप में सामने आए। अधिकारियों से यह भी अध्ययन करने को कहा गया कि बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटकों की आवाजाही किस तरह प्रभावित हो रही है।
बाबा नीब करौरी और कालिंजर को नई पहचान देने की तैयारी
बाबा नीब करौरी सर्किट और कालिंजर किले को पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत तरीके से स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। इनके प्रचार में स्थानीय इतिहास, लोककथाओं और क्षेत्र से जुड़ी कहानियों को प्रमुखता देने, स्पष्ट रूट जानकारी उपलब्ध कराने तथा इन्हें लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से जोड़ने की रणनीति पर विचार किया गया।
चित्रकूट में धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर पर्यटकों के अनुभव को व्यापक बनाने और सुविधाओं को बेहतर करने पर भी जोर दिया गया।
दिसंबर से शुरू होगी पर्यटकों की गिनती
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने AI आधारित विजिटर काउंटिंग सिस्टम में देरी पर नाराजगी जताते हुए इसे 15 नवंबर तक लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दिसंबर से पर्यटकों की गिनती शुरू होनी चाहिए। इसके लिए नाइट विजन कैमरों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।
अधिकारियों ने बताया कि यूनिक विजिटर की गिनती के लिए जरूरी मानकों का फ्रेमवर्क और खरीद से संबंधित दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जिला स्तर पर कैमरों की कवरेज बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी जिले की पर्यटन तस्वीर केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल से तय नहीं हो सकती। कम से कम चार अलग-अलग प्रकार के पर्यटन स्थलों को आकलन में शामिल करने पर जोर दिया गया।
मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में विंढम फॉल्स, नैमिषारण्य में ललिता देवी मंदिर और दधीचि कुंड जैसे स्थलों को भी आकलन में शामिल करने का सुझाव दिया गया।
दीपोत्सव में दिखेगी अयोध्या की नई तस्वीर
अयोध्या में बढ़ती पर्यटन गतिविधियों और उसके आर्थिक असर पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। मार्च से जून 2026 के दौरान गर्मी की छुट्टियों में अयोध्या में पर्यटकों की आवाजाही पिछले चार वर्षों की समान अवधि के मुकाबले करीब 535 प्रतिशत बढ़ने की बात बैठक में रखी गई।
अवनीश कुमार अवस्थी ने अधिकारियों से इस बढ़ोतरी से पैदा हो रही कारोबारी गतिविधियों, रोजगार और स्थानीय आर्थिक अवसरों का आकलन करने को कहा। उन्होंने दीपोत्सव 2026 को नए आकर्षण, बेहतर हॉस्पिटैलिटी और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।
दीपोत्सव के दौरान उद्घाटन के लिए तैयार नए होटलों की पहचान कर उन्हें आयोजन के दौरान शुरू कराने पर भी चर्चा हुई। इससे पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप ठहरने की सुविधाएं बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक दीपोत्सव के आकर्षणों में लाइव एक्रोबैटिक प्रस्तुतियां भी शामिल करने की योजना है।
भजन संध्या स्थल के अधिक प्रभावी इस्तेमाल के लिए वहां रामलीला आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया। बैठक में नए आकर्षणों के जरिए दीपोत्सव का दायरा बढ़ाने और उसका लाभ अयोध्या की हॉस्पिटैलिटी तथा स्थानीय कारोबार तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।