वैदिक सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण में आर्य समाज का महत्वपूर्ण योगदान: नरदेव चौधरी

ओ३म ध्वजारोहण और शोभायात्रा के साथ आर्य समाज के 88वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ, चार दिन तक होंगे प्रवचन, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आर्य नगर। वैदिक सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में आर्य समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित आर्य समाज ने धार्मिक चेतना के साथ सामाजिक सुधार, शिक्षा और जनजागरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बात भाजपा प्रदेश मंत्री किसान मोर्चा नरदेव चौधरी ने आर्य समाज के 88वें वार्षिकोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कही। गुरुवार को हवन-यज्ञ और ओ३म ध्वजारोहण के साथ चार दिवसीय वार्षिकोत्सव की शुरुआत हुई। आयोजन के दौरान वैदिक परंपराओं, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

वार्षिकोत्सव के शुभारंभ पर आर्य नगर स्थित महर्षि दयानंद भवन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ किया गया। इसके बाद ओ३म ध्वजारोहण हुआ और शोभायात्रा निकाली गई। आर्य समाज के प्रधान डॉ. प्रकाश आर्य, मुख्य अतिथि एवं कैबिनेट मंत्री प्रतिनिधि नरदेव चौधरी, नगरपालिका अध्यक्ष धर्मवीर अग्रवाल तथा भाजपा जिलाध्यक्ष निर्भय पांडेय ने ओ३म ध्वज दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में आर्य समाज के अनुयायी, विद्वान और स्थानीय लोग शामिल हुए। वैदिक परंपरा के अनुरूप निकली शोभायात्रा के माध्यम से समाज में धार्मिक जागरूकता, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर नरदेव चौधरी ने कहा कि आर्य समाज ने आदिकाल से चली आ रही वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को वेदों की ओर लौटने का संदेश देते हुए सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और रूढ़ियों के खिलाफ आवाज उठाई। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा देने में प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मजबूती के लिए नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कारों और वैदिक ज्ञान से परिचित कराना आवश्यक है। आर्य समाज जैसे संस्थान धार्मिक और सामाजिक चेतना को जागृत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

शोभायात्रा के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष धर्मवीर अग्रवाल ने आर्य समाज की निकासा स्थित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरपालिका इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने समाज के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि बगीची पर निर्माण कार्य जल्द से जल्द प्रारंभ कराया जाए, ताकि प्रस्तावित स्थल का उपयोग सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जा सके। उनकी घोषणा का आयोजन में मौजूद आर्य समाज के लोगों ने स्वागत किया। इस पहल को समाज की गतिविधियों के विस्तार और सामुदायिक कार्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आर्य समाज के प्रधान डॉ. प्रकाश आर्य ने बताया कि चार दिवसीय वार्षिकोत्सव के दौरान प्रवचन, भजन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वैदिक विचारधारा, भारतीय संस्कृति और महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने समाज में बढ़ते पाखंड और अंधविश्वास पर चिंता जताते हुए आर्य समाज के सदस्यों से जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ विवेक, ज्ञान और सत्य की खोज को भी महत्व दिया जाना चाहिए। समाज को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, जो लोगों में शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दें।

डॉ. प्रकाश आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने राष्ट्रहित, शिक्षा के प्रसार और समाज सुधार के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके विचारों ने लोगों को सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने और समानता तथा जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वर्तमान समय में भी इन सिद्धांतों की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने आर्य समाज के सदस्यों से अपील की कि वे वैदिक ज्ञान और समाज सुधार के संदेश को केवल आयोजनों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार और सामाजिक कार्यों के माध्यम से भी उसे आगे बढ़ाएं।

कार्यक्रम के दौरान समाज के वयोवृद्ध संरक्षक ओमप्रकाश आर्य, मंत्री सुरेंद्र आर्य, अमित आर्य और अजय आर्य ने अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। आयोजन में आर्य समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने वार्षिकोत्सव को सफल बनाने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।

इस अवसर पर अजय आर्य, ओमप्रकाश आर्य, उपप्रधान अमित आर्य, मंत्री सुरेंद्र आर्य, उपमंत्री एवं सभासद विनय आर्य, नरेंद्र कुमार आर्य, सुरेश चंद आर्य, सत्यप्रकाश, रामकिशन आर्य, विजय आर्य और दीपक आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के अनुयायी एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

आर्य समाज के 88वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठान, ध्वजारोहण और शोभायात्रा के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। आगामी चार दिनों में होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से वैदिक संस्कृति, सामाजिक सुधार और जनजागरण के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।