छतरपुर के अध्यात्म साधना केंद्र में दो दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम, मुनि श्री जयकुमार जी के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने की ‘बाहरी से भीतरी यात्रा’

नई दिल्ली/अमर भारती। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां व्यक्ति लगातार बाहरी गतिविधियों और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है, वहीं स्वयं के भीतर झांकने और अपने विचारों को समझने का अवसर कम होता जा रहा है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए छतरपुर स्थित अध्यात्म साधना केंद्र में दो दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘अंतरयात्रा–Journey Within’ का आयोजन किया गया। मुनि श्री जयकुमार जी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में ध्यान, मंत्र साधना, योग और संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, आंतरिक जागरूकता और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के लिए प्रेरित किया गया।
‘बाहरी से भीतरी यात्रा’ रही कार्यक्रम की केंद्रीय अवधारणा
‘अंतरयात्रा’ का मूल उद्देश्य प्रतिभागियों को कुछ समय के लिए बाहरी व्यस्तताओं से विराम देकर स्वयं के भीतर झांकने का अवसर देना रहा। कार्यक्रम की अवधारणा ‘बाहरी से भीतरी यात्रा’ पर केंद्रित रही, जिसमें व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार का निरीक्षण करने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजकों के अनुसार, नियमित आत्मचिंतन और सजगता व्यक्ति को अपने जीवन के प्रति अधिक जागरूक बनाने में सहायक हो सकती है। इसी उद्देश्य से कार्यक्रम में ऐसे सत्र रखे गए, जिनमें प्रतिभागियों ने आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ अपने अनुभवों और जिज्ञासाओं को भी साझा किया।
ध्यान और मंत्र साधना के जरिए मन की एकाग्रता पर जोर

दो दिवसीय कार्यक्रम में ध्यान, मंत्र साधना और योग (अंतरयात्रा) को प्रमुख स्थान दिया गया। विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को मन की एकाग्रता, आत्मनिरीक्षण और आंतरिक जागरूकता जैसे विषयों से जोड़ा गया। ध्यान सत्रों में प्रतिभागियों ने शांत वातावरण में स्वयं पर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास किया, जबकि मंत्र साधना के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन और एकाग्रता पर जोर दिया गया। योग सत्रों ने शारीरिक अभ्यास के साथ मन और जीवनशैली में संतुलन के महत्व को सामने रखा।
प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों को मिला मार्गदर्शन
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र रहा। इसमें प्रतिभागियों ने आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न प्रश्न रखे। मुनि श्री जयकुमार जी ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए आध्यात्मिक दृष्टिकोण को जीवन के व्यवहारिक पक्ष से जोड़ने पर जोर दिया। संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने भीतर उठने वाले प्रश्नों को समझने और आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। (अंतरयात्रा)
‘अंतरयात्रा’ जीवन में संतुलन का अवसर: मोहित मनोत
सृजन फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहित मनोत ने कहा कि ‘अंतरयात्रा’ व्यक्ति को कुछ समय के लिए बाहरी व्यस्तताओं से अलग होकर स्वयं पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि नियमित आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन व्यक्ति के जीवन में संतुलन और सकारात्मकता विकसित करने में सहायक हो सकते हैं। उनके अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य किसी एक गतिविधि तक सीमित न रहकर प्रतिभागियों को ऐसी साधना से जोड़ना है, जिसे वे अपने दैनिक जीवन में भी अपना सकें।
आत्मचिंतन और सजगता से जुड़ने का अवसर: हरीश जैन बरड़िया

(अंतरयात्रा) जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली के प्रचार-प्रसार प्रभारी हरीश जैन बरड़िया ने कहा कि ध्यान, मंत्र साधना और योग के माध्यम से प्रतिभागियों को स्वयं से जुड़ने और आत्मचिंतन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन व्यक्ति में सजगता और आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं। नियमित रूप से स्वयं के विचारों और व्यवहार का निरीक्षण करने से व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
सृजन फाउंडेशन की टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन में सृजन फाउंडेशन की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फाउंडेशन के पदाधिकारियों में अध्यक्ष मोहित मनोत, महासचिव वंदना जैन, उपाध्यक्ष संजीव चिंडालिया, सचिव आभा मनोत, सलाहकार राजेश बेंगाणी, सलाहकार ललित लुनिया और संगठन सचिव राजेश मालू शामिल रहे। कार्यक्रम के संयोजक के रूप में रमेश बरड़िया, हर्ष नाहटा, निशा पारख और समता चिंडालिया ने आयोजन की व्यवस्थाओं में योगदान दिया। (अंतरयात्रा)
अनुभव साझा कर प्रतिभागियों ने दिया नियमित साधना का संदेश
(अंतरयात्रा) कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने ‘अंतरयात्रा’ के दौरान अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों के अनुभवों में ध्यान, योग, मंत्र साधना और संवादात्मक सत्रों को आत्मचिंतन से जोड़ने पर विशेष जोर रहा। आयोजकों ने कहा कि ‘अंतरयात्रा–Journey Within’ का संदेश केवल दो दिवसीय आयोजन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को नियमित रूप से कुछ समय स्वयं के लिए निकालने, अपने विचारों का निरीक्षण करने और जीवन में सजगता विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। इस तरह छतरपुर के अध्यात्म साधना केंद्र में आयोजित यह कार्यक्रम ‘बाहरी गतिविधियों से भीतर की ओर यात्रा’, आत्मनिरीक्षण और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के महत्व को रेखांकित करते हुए संपन्न हुआ।
यहां भी पढ़ें-