मध्य प्रदेश के छतरपुर में बड़ा मलहरा अस्पताल से महिला का शव एंबुलेंस न मिलने की वजह से कचरा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में घर भेजने का मामला सामने आया।

नई दिल्ली/अमर भारती। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाली घटना सामने आई है। यहां बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद एक महिला का शव घर ले जाने के लिए नगर पालिका की कचरा ढोने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। परिवार का आरोप है कि उन्होंने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या अन्य वाहन का घंटों इंतजार किया, लेकिन कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया। वीडियो में शव को कचरा ढोने के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाते हुए देखा गया। घटना के सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है और सरकारी अस्पतालों में शव परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
4 जुलाई से लापता थी रुखसाना खान
मृतक महिला की पहचान रुखसाना खान के रूप में हुई है। बताया गया है कि वह 4 जुलाई से लापता थीं। 5 अगस्त को उनका शव सूरजपुर रोड के पास कचरे के ढेर से बरामद हुआ था। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल लाया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल में वाहन का इंतजार करता रहा। परिवार के मुताबिक, कई घंटे बीत जाने के बाद भी शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या मॉर्चरी वाहन की व्यवस्था नहीं हो सकी।
कचरा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखा शव
मृतका के पति बबलेश अहिरवार के अनुसार, जब काफी इंतजार के बाद भी शव ले जाने के लिए एंबुलेंस या अन्य कोई वाहन नहीं मिला, तो परिवार को नगर पालिका की ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराई गई। इसी वाहन में रुखसाना का शव रखकर उनके घर भेजा गया। यह ट्रैक्टर-ट्रॉली आमतौर पर कचरा ढोने के लिए इस्तेमाल की जाती है। शव को इस तरह ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद घटना ने तूल पकड़ लिया।
कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीणा ने जांच कराई है। कलेक्टर के मुताबिक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और अनुविभागीय दंडाधिकारी की जांच के बाद स्थानीय ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि अस्पताल या नगर पालिका की ओर से इस मामले में और कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या मॉर्चरी वैन या एंबुलेंस उपलब्ध थी, अगर उपलब्ध थी तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और शव ले जाने के लिए कचरा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था किसके निर्देश पर की गई। इससे पहले राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने भी घटना को गंभीर बताते हुए बड़ा मलहरा के बीएमओ से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर शव ले जाने के लिए दो वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इसे बेहद शर्मनाक और असंवेदनशील घटना बताया। उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उमंग सिंघार ने सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सरकार एयर एंबुलेंस जैसी सुविधाओं की बात करती है, तो क्या जमीन पर शव को घर पहुंचाने के लिए कचरा ढोने वाली गाड़ी का इस्तेमाल करना ही मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का मॉडल है? फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि शव परिवहन की व्यवस्था में चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
यहां भी पढ़ें-