
गोरखपुर, 18 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर रविवार रात गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विधि-विधान से महानिशा पूजन और हवन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस विशेष अनुष्ठान में उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और समस्त चराचर जगत के कल्याण की कामना की। दो घंटे से अधिक समय तक चले पूजन कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने मां आदिशक्ति के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की आराधना की।
गोरखपुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले शिवावतार बाबा गोरखनाथ के मुख्य मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर शीश नवाकर उनका आशीर्वाद लिया। देर शाम शुरू हुआ महानिशा पूजन का कार्यक्रम रात तक चला।
गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में गोरक्षपीठाधीश्वर के नेतृत्व में महानिशा पूजन का अनुष्ठान शुरू हुआ। उनके गर्भगृह में प्रवेश करते ही शक्तिपीठ वैदिक मंत्रोच्चार और मां भगवती के जयकारों से गूंज उठा। अनुष्ठान के दौरान गौरी-गणेश पूजन, वरुण पूजन, पीठ पूजन, यंत्र पूजन और मां दुर्गा की विधिवत आराधना की गई। इसके साथ ही भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का षोडशोपचार पूजन, भगवान श्रीकृष्ण एवं गोमाता की पूजा तथा नवग्रह पूजन भी संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री ने विल्व पूजन, अधिष्ठात्री देवता पूजन और शस्त्र पूजन के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग, अर्धनारीश्वर तथा शिव-शक्ति की आराधना की। अनुष्ठान में बटुक भैरव, काल भैरव और त्रिशूल पर्वत का पूजन भी किया गया। हवन वेदी पर ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और अग्निदेव का आह्वान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
शक्तिपीठ में स्थापित वेदी पर उगे जौ के पौधों को काटने की परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने मां आदिशक्ति से सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। श्रीदुर्गासप्तशती के पाठ और वैदिक मंत्रों के बीच हवन के साथ महानिशा पूजन का अनुष्ठान पूर्ण हुआ।
अंत में आरती और क्षमा याचना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।