भारत का बासमती चावल खरीदेगा अफगानिस्तान? डील हुई तो पाकिस्तान को होगा बड़ा नुकसान

अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल खरीदने पर विचार कर रहा है। अगर यह डील सफल होती है तो भारत के निर्यात को बड़ा फायदा और पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच संभावित बासमती चावल व्यापार समझौता
अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल आयात करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

नई दिल्ली/अमर भारती। भारत के बासमती चावल की मांग दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है। अब अफगानिस्तान भी सीधे भारत से बासमती चावल खरीदने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस संबंध में शुरुआती स्तर की बातचीत शुरू हो चुकी है। यदि यह प्रस्तावित व्यापारिक समझौता सफल होता है तो भारत को बड़ा निर्यात बाजार मिल सकता है, जबकि पाकिस्तान को अपने पारंपरिक बाजार में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अफगानिस्तान बन सकता है भारत का नया बड़ा ग्राहक

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक बैठक में भारत और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच बासमती चावल व्यापार को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल आयात करने की संभावनाएं तलाश रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार शुरू होता है तो भारत के बासमती निर्यात को नई मजबूती मिलेगी।

पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

अफगानिस्तान में बासमती चावल की सालाना खपत करीब 5 लाख टन बताई जाती है। भौगोलिक निकटता और जमीनी संपर्क के कारण अफगानिस्तान अब तक अपनी अधिकांश बासमती जरूरतें पाकिस्तान से पूरी करता रहा है। ऐसे में यदि भारत सीधे अफगानिस्तान को बासमती चावल निर्यात करना शुरू करता है तो पाकिस्तान के लिए यह बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है। उसे अपने सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में से एक में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

अफगानिस्तान ने भारत की ओर क्यों बढ़ाया कदम?

हाल के वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में तनाव देखने को मिला है। इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में अफगानिस्तान दुबई और ईरान के व्यापारियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बासमती चावल खरीदता है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त लागत जुड़ जाती है, जिससे उत्पाद महंगा पड़ता है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, अफगान अधिकारियों का मानना है कि भारत से सीधे आयात करने पर लागत कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक भरोसेमंद बन सकेगी।

भारत-अफगानिस्तान के बीच बासमती व्यापार का इतिहास

भारत और अफगानिस्तान के बीच बासमती चावल का व्यापार नया नहीं है, लेकिन इसका स्तर अब तक सीमित रहा है। वर्ष 2005-06 में भारत ने अफगानिस्तान को लगभग 63 टन बासमती चावल निर्यात किया था। इसके बाद कुछ वर्षों तक निर्यात में गिरावट रही, लेकिन 2010-11 से यह फिर शुरू हुआ। भारत ने अफगानिस्तान को सबसे अधिक बासमती चावल वर्ष 2020-21 में निर्यात किया था। उस दौरान लगभग 19,440 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ, जिसकी कुल कीमत 108.9 करोड़ रुपये रही। वहीं अप्रैल 2026 में भारत से अफगानिस्तान को 979 टन बासमती चावल निर्यात किया गया, जिसका मूल्य लगभग 7.74 करोड़ रुपये था।

भारत को क्या होगा फायदा?

यदि भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा बासमती व्यापार शुरू होता है तो भारतीय किसानों, निर्यातकों और कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे भारतीय बासमती को एक नया और स्थायी बाजार मिलेगा, साथ ही निर्यात आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया में कृषि व्यापार के नए अवसर खोल सकता है और भारत की वैश्विक बासमती बाजार में स्थिति को और मजबूत बना सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत शुरुआती चरण में है। यदि व्यापारिक और लॉजिस्टिक स्तर पर सहमति बनती है तो आने वाले समय में अफगानिस्तान सीधे भारत से बड़े पैमाने पर बासमती चावल आयात कर सकता है। इससे क्षेत्रीय व्यापार समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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