BRICS समिट: गलवान विवाद के बाद पहली मुलाकात की संभावना, क्या बदलेंगे भारत-चीन रिश्ते?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और चीन के रिश्तों को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह दौरा होता है, तो कोविड-19 महामारी और 2020 के गलवान सीमा विवाद के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर टिकीं निगाहें, BRICS सम्मेलन बनेगा मंच
भारत-चीन संबंध के लिहाज से शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसी सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति के शामिल होने की संभावना है।
अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात होगी। सीमा विवाद और पिछले कुछ वर्षों में बढ़े तनाव के बावजूद इस दौरे को कूटनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है।
गलवान विवाद और कोरोना काल के बाद पहली संभावित यात्रा
शी जिनपिंग की यह संभावित भारत यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 में हुए गलवान सीमा विवाद के बाद से चीन के राष्ट्रपति भारत नहीं आए हैं।

ऐसे में अगर सितंबर में उनका भारत दौरा तय होता है तो यह दोनों देशों के संबंधों में एक नए कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जाएगा। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच यह बैठक वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
BRICS सम्मेलन में पुतिन और ईरान की भागीदारी भी अहम
नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है। क्रेमलिन की ओर से पहले ही पुतिन की भारत यात्रा के संकेत दिए जा चुके हैं।
वहीं, BRICS सदस्य देश ईरान भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेगा। हालांकि, ईरान की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
SCO बैठक से पहले मोदी की भी अहम कूटनीतिक मुलाकातें संभव
BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किर्गिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है।
इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। यह SCO शिखर सम्मेलन अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद सदस्य देशों की पहली शीर्ष बैठक होगी।
बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया के हालात, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा अहम मानी जा रही है।

पाकिस्तान से भी पीएम मोदी को मिल सकता है SCO सम्मेलन का न्योता
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान से भी आमंत्रण मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक निमंत्रण भेजा जा सकता है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मेजबान देश होने के नाते SCO के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को आमंत्रित करना उसकी जिम्मेदारी है। पाकिस्तान सितंबर 2026 में SCO की अध्यक्षता संभालेगा और 2027 में इस्लामाबाद में सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
कूटनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत?
भारत-चीन संबंध लंबे समय से सीमा विवाद और आपसी तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में BRICS शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की संभावित मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह बैठक क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर नई दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
भारत-चीन रिश्तों के लिए क्यों अहम है ये घटनाक्रम?
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, इस दौरे की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन BRICS सम्मेलन को लेकर दोनों देशों की कूटनीतिक गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। (Expose India)
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