Iran-US Conflict में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी टैंकर हमले के बाद ईरान ने जॉर्डन और होर्मुज स्ट्रेट में जवाबी कार्रवाई की। जानिए पूरा घटनाक्रम।

नई दिल्ली/अमर भारती। मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। ईरान के इस पलटवार में फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाना निशाने पर आया। ताजा घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव का खतरा बढ़ा दिया है।
ईरान ने कई जहाजों को बनाया निशाना
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई जहाजों पर हमले किए। ईरानी पक्ष का दावा है कि कार्रवाई में अमेरिकी जहाज भी निशाने पर थे। होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे तनाव का सबसे संवेदनशील केंद्र बन गया है। दुनिया के तेल व्यापार के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को भी निशाना बनाया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, बड़ी संख्या में मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, जबकि कुछ अन्य मिसाइलें आबादी वाले इलाकों से दूर गिरीं। अमेरिकी अधिकारियों ने भी अमेरिकी बलों के सुरक्षित होने की जानकारी दी। होर्मुज की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ईरान निरंतर जबाव दे रहा है।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा टकराव
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट करने की कार्रवाई की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह कार्रवाई अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। अमेरिका का आरोप है कि इन तेल टैंकरों का इस्तेमाल ईरान के IRGC और उससे जुड़े क्षेत्रीय नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी कार्रवाई में टैंकरों के चालक दल को पहले जहाज छोड़ने के लिए कहा गया था। अमेरिका का मानना है कि होर्मुज को सार्वजनिक रूप से खोल दिया जाए।
कासिम बशीर मिसाइल का भी जिक्र
ईरान ने इससे पहले अपनी नई बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर भी संदेश दिया था। ईरानी मीडिया में कासिम बशीर मिसाइल को लेकर दावे किए गए और इसे ईरान की सैन्य क्षमता में महत्वपूर्ण विकास के तौर पर पेश किया गया। ईरानी अधिकारियों ने यह संकेत देने की कोशिश की कि अगर उसके हितों या सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाता है तो तेहरान जवाबी कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा। होर्मुज ईरान की रीड है जहां अमेरिका आंख गढ़ाए बैठा है।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मोर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम रणनीतिक क्षेत्र बन गया है। अमेरिका इस समुद्री मार्ग को खुला रखने की बात कर रहा है, जबकि ईरान अपनी शर्तों के मुताबिक जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान से जुड़े समुद्री खतरे और बंदरगाहों पर दबाव के कारण बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाजों के मार्ग में बदलाव करना पड़ा है।
तेल बाजार पर भी बढ़ा दबाव
मिडिल-ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के दौरान तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या फिर पूरे मिडिल-ईस्ट में एक बड़े संघर्ष का रूप लेता है। फिलहाल दोनों पक्षों की कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।
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