जंतर-मंतर प्रदर्शन: गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश, 14 साल की प्रदर्शनकारी लड़की को सुरक्षा का आदेश

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति (HPEC) को जांच शुरू करने का आदेश दिया है। समिति को प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और संपत्ति के नुकसान की जांच करनी है। कोर्ट ने 14 साल की एक प्रदर्शनकारी लड़की को सुरक्षा देने का भी निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को जांच शुरू करने का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में पांच सदस्यीय HPEC को जांच शुरू करने को कहा है। जांच के दायरे में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा के आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा समिति पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और प्रदर्शन के दौरान हुई संपत्ति के नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच करेगी। HPEC की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
20 जुलाई के संसद मार्च से जुड़ा है मामला
यह मामला 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च से जुड़ा है। दिए गए कंटेंट के मुताबिक, प्रदर्शन की शुरुआत NEET पेपर लीक के विरोध में हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, जो 25 जुलाई को दे दिया गया।
इसके बाद सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक समिति का गठन किया था। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम की जांच अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC करेगी।

10 सितंबर की सुनवाई में गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश
10 सितंबर को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने समिति को गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सबूत जमा कराने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने को भी कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन से जुड़े संवैधानिक सवालों पर फैसला अदालत खुद करेगी। इनमें फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं, HPEC के पुनर्गठन की मांग करने वाली याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
14 साल की प्रदर्शनकारी लड़की को सुरक्षा का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल की एक प्रदर्शनकारी लड़की और उसके परिवार को खतरे की आशंका के मद्देनजर दिल्ली पुलिस को जल्द जांच और सुरक्षा देने का निर्देश दिया है।
दिए गए कंटेंट के मुताबिक, यह मामला दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा है, जिन्हें लड़की के पिता पर हमले का दावा करने के बाद हिरासत में लिया गया था। लड़की की ओर से धमकी और छेड़छाड़ की गई तस्वीरें फैलाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो के तहत भी केस दर्ज होने की बात कही गई है।
HPEC की भूमिका और अगली सुनवाई
HPEC की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति जांच के आधार पर सिफारिश दे सकती है, लेकिन उसे FIR दर्ज कराने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. मोनिका गुसाईं और सी. सोलोमन को न्याय मित्र नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन की जांच में इन पहलुओं पर रहेगा फोकस
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में HPEC की जांच मुख्य रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और संपत्ति के नुकसान से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित रहेगी। वहीं, गवाहों की पहचान गोपनीय रखने और सबूतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जांच पर टिकी निगाहें
जंतर-मंतर प्रदर्शन की जांच अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर HPEC शुरू करेगी। समिति पेलेट गन, हिंसा, पुलिसकर्मियों की चोट और संपत्ति नुकसान से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी, जबकि 14 साल की प्रदर्शनकारी लड़की को सुरक्षा देने का भी आदेश दिया गया है। (Expose India)
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