झारखंड में 25 दिन के छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने JSSC CGL समेत 22 परीक्षाएं रद्द कर दीं। 6 परीक्षाएं स्थगित और 17 भर्तियां CID जांच के घेरे में हैं।

नई दिल्ली/अमर भारती। झारखंड में छात्रों के करीब 25 दिन तक चले आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में JSSC CGL परीक्षा समेत 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा 6 परीक्षाओं को स्थगित किया गया है, जबकि 17 भर्तियों को जांच के दायरे में लाया गया है। इन भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की जांच अब CID करेगी।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से मंगलवार देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया गया। सरकार के इस फैसले के बाद जहां परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे बड़ी जीत बताया है, वहीं JSSC CGL में चयनित अभ्यर्थियों के सामने अब भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है।
JSSC CGL परीक्षा रद्द, चयनित अभ्यर्थियों पर क्या असर?
JSSC CGL परीक्षा विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत 1,932 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। सरकार ने SIT और CID की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद जिन अभ्यर्थियों का चयन सरकारी नौकरी के लिए हुआ था, उन्हें अब परीक्षा रद्द होने का सीधा असर झेलना पड़ रहा है। चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक, करीब 2,627 उम्मीदवारों ने चयन प्रक्रिया पूरी की थी, जबकि कुछ रिपोर्टों में चयनित उम्मीदवारों की संख्या लगभग 2,000 बताई जा रही है।
परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों का एक वर्ग सरकार के फैसले का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से उन उम्मीदवारों को नुकसान हो रहा है जिन्होंने मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है।
चयनित अभ्यर्थियों ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
JSSC CGL परीक्षा में चयनित कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अपनी नियुक्ति और भविष्य पर पुनर्विचार करने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनमें से कई आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। कुछ उम्मीदवारों ने सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में अपनी पिछली नौकरी तक छोड़ दी थी। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उनके सामने रोजगार और भविष्य दोनों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। चयनित उम्मीदवारों का तर्क है कि सरकार को कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों का नुकसान न हो।
22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 भर्तियां जांच के घेरे में
झारखंड कैबिनेट के फैसले का असर सिर्फ JSSC CGL तक सीमित नहीं है। सरकार ने कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। इसके साथ ही 6 परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। वहीं 17 भर्ती प्रक्रियाओं को जांच के दायरे में लाया गया है। इन मामलों में कथित अनियमितताओं की जांच CID को सौंपी जाएगी। सरकार का उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई शिकायतों की गहराई से जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में था।
JPSC-JSSC मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
सरकार ने परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और कदाचार के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए हाई कोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे में मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था जरूरी है।
JPSC-JSSC में बनेगा इंटरनल मॉनिटरिंग सेल
परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने JPSC और JSSC के भीतर इंटरनल मॉनिटरिंग सेल बनाने का भी निर्णय लिया है। यह सेल परीक्षा प्रक्रियाओं की लगातार निगरानी करेगा और संभावित अनियमितताओं की पहचान करने का काम करेगा। सरकार की ओर से प्रस्तावित नई व्यवस्था का मकसद भविष्य में पेपर लीक, कदाचार और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसी शिकायतों को रोकना है।
छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम
करीब 25 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद सरकार का यह फैसला झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों को सरकार के फैसले से राहत मिली है, तो दूसरी तरफ JSSC CGL में चयनित अभ्यर्थी अब अपनी नियुक्ति को लेकर सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा किस प्रक्रिया के तहत कराया जाएगा और पहले से चयनित उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर सरकार क्या रास्ता निकालती है। साथ ही CID जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।
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