विश्व के शीर्ष 10 स्कूलों में शामिल हुआ लखनऊ का सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल: संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा

लखनऊ। गोमती नगर स्थित स्कूल ऑफ कॉन्शियस ट्रांसफॉर्मेशन, सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था टी4 एजुकेशन ने स्कूल को ‘वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान स्कूल को भावनात्मक जागरूकता, आत्म-चिंतन, मानसिक कल्याण, भीतरी विकास और सजग शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर और प्रभावशाली प्रयासों के लिए प्रदान किया गया है। ऑस्ट्रेलिया, एशिया, यूरोप, अमेरिका सहित दुनिया भर के अग्रणी स्कूलों की प्रविष्टियों के बीच सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल को कम्युनिटी कोलैबोरेशन कैटेगरी में दुनिया के शीर्ष 10 स्कूलों में स्थान मिला है। इस उपलब्धि के साथ सर्वांगीण और मानव-केंद्रित शिक्षा के जयपुरिया मॉडल को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।

स्कूल की प्रिंसिपल प्रोमिनी चोपड़ा ने बताया कि वर्ष 1992 में स्थापित इस संस्थान ने पिछले तीन दशकों में आत्म-जागरूकता और अकादमिक उत्कृष्टता के संतुलन पर आधारित एक विशिष्ट शैक्षणिक मॉडल विकसित किया है। स्कूल लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करता रहा है। वर्ष 2025 में आईसीएसई कक्षा 10 का औसत परिणाम 89.22 प्रतिशत तथा वर्ष 2026 में 87.9 प्रतिशत रहा। वहीं, वर्ष 2026 में आईएससी का औसत परिणाम 87.06 प्रतिशत दर्ज किया गया। कई विषयों में छात्रों का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से तीन गुना तक बेहतर रहा। स्कूल का लक्ष्य विद्यार्थियों के शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक विकास को समान महत्व देकर उनके व्यक्तित्व का समग्र निर्माण करना है।

‘संस्कार देने वाली शिक्षा’ से जीवनभर के लिए तैयार हो रहे छात्र

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल का मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों को विकसित करने वाली होनी चाहिए। इसी सोच के साथ छात्रों की उम्र और आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रोजेक्ट्स संचालित किए जाते हैं, जो उन्हें स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाने और बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करते हैं। संस्थान के अनुसार वर्ष 2011 के बाद से दो लाख से अधिक विद्यार्थी आत्म-अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत परिवर्तन की इस यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं।

परिवार और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की अनूठी पहल

स्कूल की ‘एसएमआरजे संवाद’ पहल छात्रों, अभिभावकों और दादा-दादी या नाना-नानी को एक साझा मंच पर लाती है। इन संवाद सत्रों का उद्देश्य परिवारों में संवाद को मजबूत बनाना, भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर करना और बच्चों के मानसिक विकास को प्रोत्साहित करना है। यह पहल विशेष रूप से बढ़ते स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया, गेमिंग और रील्स की लत जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो रही है तथा स्वस्थ डिजिटल आदतों को बढ़ावा देती है।

दिन में चार बार होता है ‘साइलेंस टाइम’, पूरे परिसर में छा जाती है शांति

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की संस्थापक एवं वाइस चेयरपर्सन अंजलि जयपुरिया के अनुसार संस्थान की सबसे विशिष्ट परंपराओं में से एक ‘साइलेंस टाइम’ है, जिसका आयोजन प्रतिदिन चार बार किया जाता है। इस दौरान पूरे परिसर में मदर्स ऑर्गन का मधुर संगीत बजता है और नर्सरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के छात्र, शिक्षक, प्रशासनिक एवं सेवा कर्मचारी कुछ क्षणों के लिए पूर्ण शांति की अवस्था में आ जाते हैं। आभार और आत्म-चिंतन की यह प्रक्रिया विद्यार्थियों में भावनात्मक संतुलन, एकाग्रता और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करती है। यह पहल भगवद्गीता की उस सीख से प्रेरित है, जिसके अनुसार उच्च उद्देश्य के लिए किया गया प्रत्येक कार्य परिवर्तन का माध्यम बनता है।

नवसृजन के माध्यम से शिक्षा का लाभ वंचित वर्ग तक पहुंचा रहा स्कूल

स्कूल की सामुदायिक सेवा पहल ‘नवसृजन’ सामाजिक समावेशन का उत्कृष्ट उदाहरण है। वर्ष 2010 में शुरू किया गया यह निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम विद्यालय एनआईओएस बोर्ड से संबद्ध है और किंडरगार्टन से कक्षा 10 तक शिक्षा प्रदान करता है। नवसृजन के विद्यार्थियों को मुख्य विद्यालय की तरह लाइब्रेरी, प्रयोगशालाओं, खेल और कला सुविधाओं का समान लाभ मिलता है। मेधावी छात्रों को 11वीं कक्षा में मुख्य स्कूल में प्रवेश दिया जाता है और यहां से पढ़कर निकले कई विद्यार्थी आईआईटी, लेडी श्रीराम कॉलेज और हिंदू कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचे हैं।

समाज में बदलाव की ताकत बन रहे नवसृजन के पूर्व छात्र

नवसृजन के पूर्व छात्र अब समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन रहे हैं। शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में बदलाव लाने के बाद वे जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता कर रहे हैं और सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षणिक रूप से परिवारों को सशक्त बना रहे हैं। कई पूर्व छात्र लखनऊ के विभिन्न स्कूलों में शिक्षक और मेंटर के रूप में कार्यरत हैं, जो स्थानीय संस्कृति और भाषा को संरक्षित रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधार में निभा रहा अहम योगदान

काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने भी इस स्कूल की अभिनव शैक्षणिक पद्धतियों को मान्यता दी है। परिषद ने स्कूल को अपने शैक्षणिक तौर-तरीकों के पायलट परीक्षण और देशभर के शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए चुना है। इससे यह संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधार और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मिली पहचान

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के ‘हीलिंग हैबिटैट’ मॉडल को हफपोस्ट और यूसी बर्कले के ग्रेटर गुड साइंस सेंटर द्वारा फीचर किया जा चुका है। इसके साथ ही यह दोनों मंचों पर स्थान पाने वाला भारत का पहला स्कूल बन गया है। टीचर्स विदाउट बॉर्डर्स के संस्थापक फ्रेड मेडनिक ने भी स्कूल की विभिन्न परियोजनाओं का दस्तावेजीकरण किया है। इसके अतिरिक्त छात्रों को सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक आधारित नवाचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने दृष्टिबाधित लोगों की खरीदारी में सहायता करने वाला एक विशेष उपकरण भी विकसित किया है।

संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा

सेठ एमआर जयपुरिया समूह की सभी 66 शाखाओं में नर्सरी से कक्षा आठ तक संस्कृत को अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। इसके लिए ‘देवभाषा’ नामक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जो वेदों, उपनिषदों और भगवद्गीता पर आधारित है। यह पाठ्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और ज्ञान परंपरा को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए विद्यार्थियों में संस्कारयुक्त शिक्षा का आधार मजबूत करता है।