नौकरी के नाम पर बच्चों से ठगी के आरोप, कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल


निघासन-खीरी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर बच्चों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने और बाद में उन्हें भटकता छोड़ देने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवारों ने इंदिरा नगर निवासी अभिषेक कुमार पर नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और इसके बाद फरार होने का आरोप लगाया है।
पीड़ितों के मुताबिक, आरोपी ने बच्चों को नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे अलग-अलग रकम ली थी। नौकरी नहीं मिलने और आरोपी के संपर्क से बाहर होने के बाद पीड़ित परिवारों ने मामले की शिकायत थाना पढ़ुवा में की। हालांकि, पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि इस मामले को लेकर पहले भी खबर प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। लाखों रुपये की कथित ठगी के आरोपों के बीच पीड़ित परिवार आर्थिक संकट का सामना करने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि नौकरी की उम्मीद में रकम देने के बाद अब वे न्याय के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मामले में थाना पढ़ुवा पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यदि शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी है तो उसकी जांच किस स्तर तक पहुंची? आरोपी से पूछताछ क्यों नहीं की गई और पीड़ितों के बयान दर्ज कर मामले में आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यह भी सवाल उठ रहा है कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश और कथित लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए क्या कदम उठाए हैं। हालांकि, मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव या किसी अन्य कारण से कार्रवाई प्रभावित होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल कथित आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े होंगे।
पीड़ित परिवारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनकी रकम वापस दिलाने की मांग की है। साथ ही पुलिस से शिकायत की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की भी अपील की है।
अब देखना होगा कि थाना पढ़ुवा पुलिस इस मामले में जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और पीड़ित परिवारों को कब तक न्याय मिल पाता है।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप पीड़ितों/शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।