NEET Paper Leak विवाद के बाद परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर्ड Expert Task Force बनाई गई है। Nandan Nilekani, S Somnath, Tapan Deka समेत 6 विशेषज्ञ NTA और परीक्षा प्रणाली में Structural Reforms पर सुझाव देंगे।

नई दिल्ली/अमर भारती। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हफ्तों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है। नकल, पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट टास्क फोर्स का गठन किया है।
इस टीम में देश के टेक्नोलॉजी सेक्टर के दिग्गजों से लेकर पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक, पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी, शिक्षाविद, पूर्व शिक्षा सचिव और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ तक शामिल हैं। यह टीम भारत की परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों को लेकर केंद्र सरकार को सुझाव देगी। इसका एक बड़ा फोकस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नए सिरे से तैयार करना और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना होगा।
PM Modi ने की थी टास्क फोर्स की घोषणा
NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की।
इस टास्क फोर्स की कमान टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश की परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से गठित यह टीम परीक्षा सुधारों पर काम करेगी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाएगी।
नंदन नीलेकणि: परीक्षा व्यवस्था में Technology और Data Security का जिम्मा
नंदन नीलेकणि भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रमुख नामों में शामिल हैं। उन्होंने Infosys की सह-स्थापना की और UIDAI के अध्यक्ष के रूप में आधार परियोजना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने IIT Bombay से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। टेक्नोलॉजी और डेटा सिक्योरिटी के क्षेत्र में उनके अनुभव का इस्तेमाल परीक्षा प्रणाली को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने में किया जा सकता है। परीक्षा के लिए एक सुरक्षित End-to-End Encrypted Platform, मजबूत डेटा सुरक्षा और डिजिटल सिस्टम की निगरानी जैसे क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण हो सकती है।
पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ: Zero-Error System पर जोर
एस. सोमनाथ देश के जाने-माने Aerospace Engineer और ISRO के पूर्व चेयरमैन हैं। उनकी अगुवाई में भारत ने Chandrayaan-3 मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने Indian Institute of Science, Bengaluru से Aerospace Engineering में मास्टर डिग्री हासिल की और IIT Madras से डॉक्टरेट की।
स्पेस मिशन में जिस तरह कई स्तरों पर सुरक्षा और जांच की व्यवस्था होती है, उसी तरह की Zero-Error Process परीक्षा प्रणाली में भी लागू की जा सकती है। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, परीक्षा संचालन और रिजल्ट जारी करने तक हर चरण में Multi-Layer Verification लागू करने में उनकी विशेषज्ञता मददगार हो सकती है।
पूर्व IB डायरेक्टर तपन डेका: Paper Leak Mafia पर Intelligence Action
तपन कुमार डेका भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी और Intelligence Bureau के पूर्व डायरेक्टर हैं। उन्होंने IB के 28वें डायरेक्टर के रूप में काम किया है। फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट तपन डेका परीक्षा माफिया और पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ खुफिया तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल Paper Leak Gangs की पहचान, Cyber Intelligence और Real-Time Monitoring System विकसित करने में किया जा सकता है। इससे परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करने वाले संगठित नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई संभव हो सकती है।
IIT Madras के निदेशक वी. कामाकोटी: Cyber Security की चुनौती
वी. कामाकोटी IIT Madras के निदेशक हैं और Computer Science तथा Information Security के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने IIT Madras से ही MS और PhD की पढ़ाई की है। वह Microprocessor Development और Information Security Education से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। परीक्षा प्रणाली के Software, Servers और Digital Infrastructure को Cyber Attack से बचाने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण हो सकती है। NTA की डिजिटल व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने और हैकिंग या डेटा चोरी के खतरे को कम करने के लिए तकनीकी प्रोटोकॉल तैयार करने में उनका अनुभव उपयोगी होगा।
पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल: Academic और Student Policy में अनुभव
अनीता करवाल गुजरात कैडर की पूर्व IAS अधिकारी हैं। वह केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के School Education and Literacy Department में सचिव के पद पर रह चुकी हैं। उनका अनुभव परीक्षा से जुड़े Academic Reforms और Student Policy में काम आ सकता है। Grace Marks Policy, Answer Key से जुड़ी समस्याओं, परीक्षा केंद्रों के मानकों और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा: पेपर की Printing से Transportation तक
अमृत लाल मीणा पूर्व नौकरशाह और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं। उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में Logistics से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर भी काम किया है। प्रश्नपत्रों की Printing, Storage और Transportation परीक्षा सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल हैं। इस क्षेत्र में GPS Tracking, Digital Lock वाले कंटेनर और सुरक्षित Transportation Network जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं।
ऐसी तकनीक के जरिए यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रश्नपत्र केवल निर्धारित समय और निर्धारित स्थान पर ही खोले जा सकें। इससे Strong Room या Transportation के दौरान प्रश्नपत्रों से छेड़छाड़ और उनकी अनधिकृत तस्वीरें खींचे जाने की आशंका को कम किया जा सकता है।
NTA में बड़े Structural Reforms की तैयारी
हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को नए सिरे से मजबूत करना है। Technology, Cyber Security, Intelligence, Logistics और Academic Policy- इन सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर सरकार परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। अब इस टीम की सिफारिशों पर नजर रहेगी। अगर इसके सुझाव लागू होते हैं, तो आने वाले समय में भारत की परीक्षा प्रणाली में Digital Security, Multi-Layer Verification, Secure Logistics और Fast Response Mechanism जैसे बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा वापस हासिल करने की है। ऐसे में यह एक्सपर्ट टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।