नेपाल में भीषण जलप्रलय से तबाही, 584 मौतें और 2,482 लोग लापता, 77 कैलाश मानसरोवर यात्री भी बेखबर

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ व भूस्खलन से भारी तबाही, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा, चीन-नेपाल सीमा के पास ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों का अब तक पता नहीं

नेपाल बाढ़ के बाद ईशा फाउंडेशन के 77 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री लापता
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच ईशा फाउंडेशन के 77 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों का अब तक पता नहीं चला है।

नई दिल्ली/अमर भारती। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। शुक्रवार शाम तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल और तिब्बत में कम से कम 584 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,482 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें नेपाल में 579 मौतें और 1,924 लोग लापता हैं, जबकि तिब्बत में 5 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल में ही 320 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं।

ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों का पता नहीं

इस प्राकृतिक आपदा के बीच ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। चीन-नेपाल सीमा के पास भीषण बाढ़ आने के दो दिन बाद भी इस समूह के ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। यह 77 सदस्यीय दल आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया था। बाढ़ और भूस्खलन के बाद से समूह का संपर्क टूट गया है। ईशा फाउंडेशन की ओर से कहा गया है कि बचाव टीमें मौके पर सक्रिय हैं, लेकिन अभी तक यात्रियों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

नेपाल में 538 मौतों का एक अलग आंकड़ा भी सामने आया

नेपाल पुलिस की ओर से जारी जानकारी में एक चरण पर बाढ़ और भूस्खलन से 538 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 46 और नुवाकोट से 37 शव बरामद किए गए। इसके अलावा धाडिंग से 33, तनहु से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए।

हालांकि, राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के साथ आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। पुलिस ने संकेत दिया है कि लापता लोगों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं और सुरंगों समेत प्रभावित क्षेत्रों में तलाश जारी है।

7,451 सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे

आपदा के तीसरे दिन भी नेपाल में बड़े स्तर पर खोज और बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों के मुताबिक, अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं। हालांकि, लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक खतरे के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें बनी हुई हैं।

शुक्रवार को एक अस्थिर बैरियर झील के ओवरफ्लो होने और भोटे कोशी नदी में नई लहर आने के बाद बचाव टीमों को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद एक और हिमस्खलन में करीब 50,000 क्यूबिक मीटर बर्फ का मलबा गिरने की जानकारी सामने आई। सैटेलाइट तस्वीरों में ऊपरी इलाके में एक और बड़ी झील बनती हुई दिखाई दी है। बताया गया है कि इस झील से पानी निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आ रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

77 परिवारों को अपनों की सलामती का इंतजार

ईशा फाउंडेशन की मां गम्भीरी ने बताया कि पिछले दो दिनों से 77 तीर्थयात्रियों के बारे में कोई अपडेट नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बचाव दल जमीन पर काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यात्रियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि 77 परिवार अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और यह उनके लिए बेहद भावनात्मक संकट का समय है। सद्गुरु आपदा के केंद्र ग्यिरोंग जाने और राहत कार्य में मदद करने की इच्छा रखते थे, लेकिन उन्हें जरूरी मंजूरी नहीं मिल सकी। फाउंडेशन के मुताबिक, समूह में 19 देशों के नागरिक शामिल हैं।

लापता यात्रियों में 22 अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 ब्रिटेन, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल और अन्य देशों के नागरिक शामिल बताए गए हैं। फाउंडेशन ने भारत, चीन और नेपाल के संबंधित दूतावासों तथा मंत्रालयों से संपर्क कर यात्रियों का पता लगाने और सुरक्षित निकासी में मदद की अपील की है।

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