लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर लगी होर्डिंग: कार्यालय के बाहर लगे समर्थन वाले पोस्टर, पार्टी कार्यकर्ताओं ने जताई एकजुटता

लखनऊ। मंगलवार को दिल्ली में पीए आवास के बाहर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता जुटे। कार्यालय परिसर के बाहर अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव के समर्थन में बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए। सुबह से ही समर्थकों की आवाजाही बढ़ी रही और पूरे परिसर में पार्टी नेतृत्व के समर्थन तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े संदेश वाले बैनर लगाए गए। सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर अभियान के माध्यम से नेतृत्व के प्रति अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया और पार्टी के समर्थन में नारेबाजी भी की।

गौरतलब है कि मंगलवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ पीएम आवास के बाहर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। विपक्षी दलों ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गंभीर चूक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार इस मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है।

लखनऊ में तेज हुई सियासी गतिविधियां

दिल्ली की घटना के बाद लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार प्रदेश कार्यालय पहुंचते रहे। समर्थकों ने अखिलेश यादव और डिंपल यादव के समर्थन में पोस्टर अभियान चलाकर पार्टी नेतृत्व के साथ एकजुटता का संदेश दिया। सपा नेताओं का कहना है कि दिल्ली में हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और विपक्ष की आवाज दबाने के उद्देश्य से इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।

उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और पार्टी इस मुद्दे पर राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी। वहीं, राजधानी लखनऊ में पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग को सपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली की इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।