राम मंदिर ट्रस्ट में सभी वर्गों और वनवासी समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने राम मंदिर ट्रस्ट में सभी वर्गों, वनवासी समाज और संतों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।

राम मंदिर ट्रस्ट में सभी वर्गों और वनवासी समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग
राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में सभी वर्गों और वनवासी समाज की भागीदारी की मांग उठी।

नई दिल्ली/अमर भारती। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना में समाज के सभी वर्गों को व्यापक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी है। भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर ट्रस्टियों, पुजारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति में सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण पूरे हिंदू समाज की आस्था, संघर्ष और लंबे आंदोलन का परिणाम है। इसलिए मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक ढांचे में भी समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी दिखाई देनी चाहिए।

‘राम मंदिर ट्रस्ट में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व जरूरी’

भक्ति आंदोलन मंच न्यास के अध्यक्ष राजर्षि रामनयनदास रामायणी ने कहा कि भगवान श्रीराम पूरे समाज के आराध्य हैं। ऐसे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें समाज का हर वर्ग सम्मान के साथ अपना प्रतिनिधित्व महसूस कर सके। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में साधक संतों को भी उचित स्थान मिलना चाहिए। साथ ही, पुजारियों की नियुक्ति जाति-पंथ के भेदभाव से ऊपर उठकर की जानी चाहिए। संगठन ने मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों में व्यापक सामाजिक भागीदारी की मांग की है।

वनवासी समाज की भागीदारी पर जोर

ज्ञापन में वनवासी समाज को विशेष प्रतिनिधित्व देने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि भगवान श्रीराम के वनवास काल से वनवासी समाज का गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध रहा है। न्यास के अनुसार, रामायण परंपरा में वनवासी समाज की भूमिका भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में राम मंदिर की व्यवस्थाओं में इस समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। संगठन ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों में समाज के सभी वर्गों के प्रति सम्मान और समरसता का भाव दिखाई देता है। इसलिए मंदिर व्यवस्था में भी इसी भावना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

‘राम मंदिर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक’

करतलिया आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट, पुजारियों और कर्मचारियों के चयन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना था कि मंदिर की व्यवस्था में देश और समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व का भाव दिखाई देना चाहिए। महंत बालयोगी रामदास ने यह भी कहा कि अयोध्या के संतों को ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके अलावा सभी शंकराचार्यों और जगद्गुरुओं को भी व्यापक रूप से शामिल किए जाने पर विचार होना चाहिए।

‘किसी एक वर्ग तक सीमित न हो प्रतिनिधित्व’

संतों ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ी व्यवस्था में किसी एक पक्ष या वर्ग तक प्रतिनिधित्व सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका कहना है कि देश के विभिन्न संत परंपराओं और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से मंदिर की व्यवस्था और अधिक व्यापक एवं समावेशी बन सकती है। रावत मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बालकदास ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समानता, समरसता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। इसलिए श्रीराम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी इन मूल्यों को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए।

सामाजिक समरसता को लेकर उठी मांग

भक्ति आंदोलन मंच न्यास ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में समाज के अलग-अलग वर्गों ने अपनी भूमिका निभाई। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में भी सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करेगा। संगठन ने ट्रस्टियों, पुजारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति में व्यापक प्रतिनिधित्व और संत समाज की भागीदारी की मांग की है। अब देखना होगा कि इस मांग पर सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

यहां भी पढ़ें-

रवि किशन के जन्मदिन पर दिव्यांग बच्चों संग खुशियां साझा: वीडियो कॉल पर किया जल्द मिलने का वादा

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए रोजगार का सुनहरा अवसर: इंटरनेशनल एजुकेशन कंपनी में होगी भर्ती