RML में विश्व अस्थमा दिवस पर CME का आयोजन: आधुनिक उपचार पद्धतियों पर मंथन, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के श्वसन रोग विभाग द्वारा विश्व अस्थमा दिवस 2026 के अवसर पर एडवांसेज इन अस्थमा केयर विषय पर एक सीएमई कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मेडिकल विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम का उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा करना तथा श्वसन रोग चिकित्सा में संचार और तकनीक की भूमिका को रेखांकित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अस्थमा प्रबंधन की नवीनतम अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस पर प्रकाश डालते हुए शुरुआती पहचान, एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर थेरेपी और साक्ष्य-आधारित उपचार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से अस्थमा से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उपचार की पहुंच अब भी चुनौती

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सीएम सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय पर लक्षणों की पहचान और उचित चिकित्सकीय परामर्श से अस्थमा से होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है। नियमित उपचार और फॉलोअप से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

वहीं संस्थान के सीएमएस प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह ने कहा कि अस्थमा के निदान और उपचार में प्रगति के बावजूद सभी मरीजों तक उचित इलाज पहुंचाना आज भी चुनौती बना हुआ है, खासकर विकासशील देशों में। उन्होंने आधुनिक उपचार की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

गंभीर अस्थमा के आधुनिक इलाज पर चर्चा

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आलोक नाथ ने गंभीर और जटिल अस्थमा के उपचार पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बायोलॉजिक थेरेपी, एलर्जी इम्यूनोथेरेपी और नई इनहेल्ड उपचार पद्धतियों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

टीकाकरण और सुपरस्पेशलिटी शिक्षा पर बल

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने अस्थमा और COPD जैसे दीर्घकालिक फेफड़ों के रोगों में टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि संस्थान में जल्द ही पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन में DM पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।

सही निदान और मिथकों को तोड़ने की जरूरत

मेडिसिन विभाग की डॉ. मृदु सिंह ने सांस फूलने के विभिन्न कारणों और सही निदान के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि हर घरघराहट को अस्थमा मान लेना उचित नहीं है। वहीं, पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय सिंह ने अस्थमा से जुड़े मिथकों पर प्रकाश डालते हुए मरीजों से सही संवाद की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इनहेलर से जुड़े भ्रम उपचार में सबसे बड़ी बाधा हैं, जबकि ये सुरक्षित और प्रभावी हैं।

AI पर कार्यशाला रही आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण आर्टिफिशल इंटेलिजेंस फॉर हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स विषय पर आयोजित कार्यशाला रही, जिसका संचालन बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के डॉ. निमिष कपूर ने किया। इस दौरान चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

सफल आयोजन में कई चिकित्सकों का योगदान

आयोजन समिति में डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. सुलक्षणा गौतम और डॉ. पुलकित गुप्ता का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमन सक्सेना और डॉ. सागर जैन ने किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. पुलकित गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया।