
लखनऊ। शोध की दुनिया में सही सवाल से लेकर सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया को समझने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं रिसर्च सेल की ओर से एक दिवसीय अनुसंधान पद्धति कार्यशाला का आयोजन किया गया। आईक्यूएसी के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में अंतिम वर्ष के नर्सिंग विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को शोध की बुनियादी से लेकर व्यावहारिक बारीकियों तक की जानकारी दी गई।
दीप प्रज्वलन के साथ हुई शुरुआत
कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान अतिथियों और रिसोर्स पर्सन्स का सम्मान किया गया तथा प्रतिभागियों का प्री-टेस्ट लिया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने कार्यशाला की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। डीन प्रो. (डॉ.) राजन भटनागर ने आयोजन की सराहना करते हुए प्रतिभागियों को अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
शोध के हर पड़ाव पर हुई चर्चा
पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में अनुसंधान की आवश्यकता और महत्व से लेकर शोध प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। अनुसंधान अभिगम एवं डिजाइन, साहित्य समीक्षा, शोध प्रश्न और उद्देश्यों का निर्माण, चर एवं परिकल्पना की पहचान, सैंपल साइज, सैंपलिंग तकनीक, गुणात्मक अनुसंधान डिजाइन और रिसर्च प्रोटोकॉल लेखन जैसे विषयों पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।
विशेषज्ञों ने शोध के दौरान सही विषय के चयन, उपलब्ध साहित्य के अध्ययन, शोध प्रश्न तैयार करने और वैज्ञानिक तरीके से शोध प्रक्रिया आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी भी शोध को प्रभावी बनाने के लिए उसकी पद्धति और प्रोटोकॉल का स्पष्ट होना जरूरी है।
सवाल-जवाब से और रोचक हुए सत्र
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों का संचालन कॉलेज ऑफ नर्सिंग, सामुदायिक चिकित्सा विभाग और सामान्य चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों ने किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि सवाल-जवाब और चर्चा के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी से कार्यशाला का माहौल संवादात्मक और अकादमिक बना रहा।
पोस्ट-टेस्ट से हुआ सीखने का आकलन
कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक सत्र के साथ हुआ। पोस्ट-टेस्ट के माध्यम से प्रतिभागियों की सीख और समझ का आकलन किया गया, जबकि फीडबैक के जरिए कार्यशाला को लेकर उनकी प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गईं।
आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिव कुमार मुडगल के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. अमित कौशिक, प्रो. निपिन कलाल, डॉ. नवीना जे.एच. और डॉ. मिली सेंगर ने कार्यशाला के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यशाला के माध्यम से संस्थान में अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने, अंतर्विषयक सीख को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों तथा स्वास्थ्य पेशेवरों में वैज्ञानिक शोध की समझ विकसित करने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक और उपयोगी अकादमिक अनुभव बताया।