सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे में 6 मौतों के बाद दिल्ली में अवैध और जर्जर इमारतों पर सवाल उठे। रोहिणी, सैदुलाजाब और मुस्तफाबाद हादसों पर भी नजर।

नई दिल्ली/अमर भारती। दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद एक बार फिर राजधानी में अवैध और जर्जर निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG और किराये के कमरों में रहते हैं। ऐसे में इमारत गिरने की घटना ने छात्रों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
सत्य निकेतन हादसा महज एक हादसा नहीं?
रविवार 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक PG वाली इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के मलबे में कई लोगों के दबे होने की सूचना के बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। करीब 20 घंटे बाद भी बचाव अभियान जारी रहने की जानकारी सामने आई और हादसे में छह लोगों की मौत की खबर सामने आई। घटना के बाद सवाल यह उठा कि क्या राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की नियमित जांच होती है? अगर निर्माण नियमों का उल्लंघन हुआ था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
30 साल पुरानी बताई जा रही थी इमारत
फाइल में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 30 साल पुरानी थी और उसकी हालत जर्जर बताई जा रही थी। आसपास की कई इमारतों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। यह भी बताया गया कि कुछ इमारतों में कारोबार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कमरे और मंजिलें जोड़ी गईं, जबकि कथित तौर पर प्रशासन की ओर से इसकी अनुमति नहीं थी। यही वजह है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण पर प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
रोहिणी में तीन मजदूरों की मौत
दिल्ली में सत्य निकेतन इमारत गिरने का यह पहला मामला नहीं है। जुलाई 2026 में रोहिणी इलाके में चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस और राहत टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था, लेकिन चार मजदूरों में से तीन को बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों पर सवाल खड़े किए थे।
सैदुलाजाब में छह लोगों की गई थी जान
30 मई को साकेत/महरौली के पास सैदुलाजाब इलाके में भी पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। सत्य निकेतन इमारत को भी अवैध बताया गया था। इमारत के गिरने से बगल में स्थित कैंटीन प्रभावित हुई थी, जहां कई लोग मौजूद थे। पुलिस ने इस हादसे में 10 लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला था।
मुस्तफाबाद हादसे में 11 मौतें
18 अप्रैल 2025 को मुस्तफाबाद में चार मंजिला इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद इलाके और निर्माण को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद भी अवैध निर्माण पर कार्रवाई का मुद्दा सामने आया। सवाल यह है कि जब अवैध निर्माण शुरू होता है और धीरे-धीरे पूरी इमारत या कॉलोनी का स्वरूप बदलता है, तब प्रशासन की निगरानी कहां होती है? इससे साफ है कि सत्य निकेतन हादसा लापरवाही का नतीजा है।
हादसों के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली के पुराने और अनधिकृत निर्माण की समस्या को फिर सामने ला दिया है। लगातार हो रहे ऐसे हादसों के बाद अब केवल हादसे के बाद मुआवजा और जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जरूरत इस बात की है कि जर्जर और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की समय रहते पहचान हो, कार्रवाई हो और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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