
किरावली। Terahmori Dam के पुनरुद्धार की दिशा में एक बार फिर उम्मीद जगी है। जिला सिंचाई बंधु की 12 मई को आयोजित बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष Dr. Manju Bhadauria ने सिंचाई विभाग को बांध के क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मत और मूल संरचना के अनुरक्षण कार्य का एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पत्राचार करने को भी कहा गया है।
डा. मंजू भदौरिया ने कहा कि ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) के अंतर्गत आने वाला तेरहमोरी बांध जनपद की महत्वपूर्ण जल संचय संरचनाओं में शामिल है। मानसून के दौरान इसमें जलभराव नहीं होने से फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। कई गांवों में हैंडपंप निष्प्रयोज्य हो चुके हैं और भूजल दोहन गंभीर समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि बांध में दोबारा जलसंचय शुरू होता है तो क्षेत्र के अधिकांश गांवों में भूजल स्तर में सुधार आएगा।
अब तक सिंचाई विभाग राजस्थान के भरतपुर स्थित अजान बांध से पानी नहीं आने का हवाला देकर तेरहमोरी बांध के अनुरक्षण कार्य को टालता रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र 24 वर्ग किलोमीटर से अधिक है और यहां का वर्षाजल ही बांध को भरने के लिए पर्याप्त है।
विशेषज्ञों के अनुसार विंध्य पर्वत श्रृंखला के बलुआ पत्थर और चूना पत्थर वाले इस क्षेत्र में भूगर्भ जल रिचार्ज प्रभावित होने से पानी में सोडियम, क्लोराइड और कैल्शियम की मात्रा बढ़ रही है। इसके कारण पानी खारा होता जा रहा है और फ्लोरोसिस व हाई टीडीएस जैसी समस्याएं जनस्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं।
Fatehpur Sikri Nagar Palika Parishad की अध्यक्ष Shabana Islam ने भी ताज ट्रिपेजियम जोन प्राधिकरण को पत्र भेजकर बांध को पुनः जल संचय योग्य बनाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यदि बांध के फाटक ठीक हो जाएं तो भूजल स्तर सुधरेगा और उड़ने वाले सूक्ष्म धूल कणों पर नियंत्रण संभव होगा, जिससे आगरा के वायु प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
टीटीजेड अथॉरिटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिंचाई विभाग के तृतीय सिंचाई मंडल, लोअर खंड आगरा नहर के अधिशासी अभियंता को मानसून जल संचयन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारों के अनुसार पहले तेरहमोरी बांध में मानसून का पानी संग्रहित कर अक्टूबर में खारी नदी में छोड़ा जाता था, जो करीब 80 किलोमीटर बहते हुए फतेहाबाद क्षेत्र के मोतीपुरा गांव के पास उटंगन नदी में मिलता था। इससे आसपास के गांवों में स्वतः भूजल रिचार्ज होता था और हैंडपंप सुचारू रूप से चलते थे।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा लंबे समय से बांध के पुनरुद्धार की मांग करती रही है। संस्था से जुड़े पर्यावरणविदों का कहना है कि सीमित खर्च में स्लुइस गेटों की मरम्मत और संरचना के अनुरक्षण से तेरहमोरी बांध को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है।