क्या है बंगाल में ’37 की सियासत’ का राज़!

बेलवेदर सीट्स का मतलब

किसी राज्य या देश के समग्र रूझान को दर्शाने वाली सीटों को बेलवेदर सीटें कहा जाता है. पश्चिम बंगाल में 37 सीटों को बेलवेदर सीट्स के तौर पर देखा जाता है. ऐसा इसलिए क्यंकि करीब 51 वर्षों से इन सीटों पर जीत का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत रहा है. ऐसा माना जाता है कि पूरे देश में किसी भी राज्य में इतनी बड़ी संख्या में बेलवेदर सीटें नहीं हैं.

बेलवेदर सीटों का इतिहास

  • 1977: वाम मोर्चा (Left Front) की लहर में इन 37 सीटों पर भी वामपंथियों ने बहुमत हासिल किया और 34 साल तक सत्ता में रहे।
  • 1982-2006: लगातार वाम मोर्चा की जीत इन सीटों पर भी दिखी।
  • 2011: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लहर आई। इन 37 सीटों में TMC ने भारी बहुमत हासिल किया और वामपंथी सरकार का 34 साल पुराना राज खत्म हुआ।
  • 2016: TMC ने इन सीटों पर फिर कब्जा जमाया और सत्ता बरकरार रखी।
  • 2021: TMC ने 213 सीटें जीतीं। इन 37 बेलवेदर सीटों में भी TMC का दबदबा रहा, जबकि BJP केवल 77 सीटों पर सिमट गई।

सीटों का भौगोलिक समीकरण

ये सीटें मुख्य रूप से मध्य कोलकाता, दक्षिण बंगाल, दक्षिण-पश्चिम बंगाल और कुछ उत्तर बंगाल के हिस्सों में आती हैं. भवानीपुर, औसग्राम, उदयनारायणपुर, मगरहाट पूर्व, डायमंड हार्बर जैसी सीटें इनमें शामिल हैं. इनमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी दोनों तरह की सीटें के आंकड़ों को मापा जाता है. इन सीटों की खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह यहां भी जाति, समुदाय, स्थानीय मुद्दे और विकास के फैक्टर महत्वपूर्म भूमिका निभाते हैं।

2026 में बेलवेदर सीट्स का महत्व

इस बार 4 मई को मतगणना है। अगर भाजपा इन 37 सीटों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो पहली बार बंगाल में सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। वहीं TMC अगर इन पर कब्जा जमाती है तो चौथी बार सत्ता बरकरार रखने में सफल हो सकती है। यानी बंगाल इस बार हर हाल में एक नया इतिहास रचने जा रहा है.