
मध्य पूर्व: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। हालिया सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ शत्रुता खत्म हो चुकी है, लेकिन अमेरिकी विपक्ष और कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल, अप्रैल में हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे, लेकिन अब नई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर फिर से गतिरोध पैदा हो गया है। ट्रंप ने ईरान की ओर से आए नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं।
अमेरिका ने अभी भी खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बरकरार रखी है। अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सक्रिय है और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए समुद्री गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दबाव जारी रहा तो संघर्ष दोबारा शुरू हो सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पहले अमेरिका को प्रतिबंध हटाने होंगे और समुद्री नाकेबंदी खत्म करनी होगी।
ईरान के सीनियर मिलिट्री अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने आशंका जताई है कि अमेरिका के साथ फिर से युद्ध शुरू हो सकता है। ईरान की फॉर्स न्यूज एजेंसी ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और अगर अमेरिका कोई गलत कदम उठाता है, तो जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते या वादे का पालन नहीं करता।
असदी ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान और कदम ज्यादातर दिखावटी और मीडिया के लिए होते हैं। उनका मकसद पहले तेल की कीमतों को गिरने से रोकना और दूसरा अपनी बनाई हुई मुश्किल स्थिति से बाहर निकलना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद अहम है क्योंकि भारत अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी करता है।
इस पूरे मामले में पाकिस्तान, ओमान और कुछ यूरोपीय देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता हो सके। हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह तनाव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।