201 विधायकों के साथ सम्राट चौधरी सरकार मजबूत, विश्वास मत हासिल

NDA के पास करीब 201-202 विधायकों का समर्थन था, बहुमत के लिए केवल 122 (243) विधायकों की जरूरत थी

पटना। बिहार की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज 24 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। शपथ ग्रहण के महज नौ दिन बाद सम्राट चौधरी ने सदन में अपना बहुमत साबित कर अपनी सरकार की स्थिरता को मजबूती से प्रदर्शित कर दिया। विधानसभा के विशेष एक दिवसीय सत्र में विश्वास मत का प्रस्ताव ध्वनि मत (वॉइस वोट) से पारित हो गया।

मतदान की औपचारिक प्रक्रिया की जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि एनडीए के पास 243 सदस्यीय सदन में करीब 201-202 विधायकों का स्पष्ट समर्थन था, जबकि बहुमत के लिए केवल 122 विधायकों की जरूरत होती है। इस मजबूत संख्या बल के कारण सरकार ने आसानी से सदन का विश्वास जीत लिया।बहस के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उस दौर में उनके साथ अत्याचार नहीं हुआ होता तो शायद वे आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व और सिद्धांतों की सराहना की तथा “विकसित बिहार” के लक्ष्य को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

सम्राट चौधरी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए व्यक्तिगत टिप्पणी भी की और कहा, “जो अपने घर में बहन का सम्मान नहीं कर सकता, वह दूसरों का क्या करेगा।” इस बयान से सदन में सियासी तापमान बढ़ गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी सरकार 3C — क्राइम, कम्यूनलिज्म और करप्शन — से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगी। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के हित और सुशासन को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए विकास एजेंडे पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।