शिवपुरी के नरवर किले से 500 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी, 3 टन वजनी धरोहर ले गए हथियारबंद बदमाश

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर पर बड़ी सेंध

Historic Narwar Fort in Shivpuri where a 500-year-old cannon was allegedly stolen during the night.
शिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले से 500 साल पुरानी अष्टधातु की तोप चोरी होने के बाद जांच में जुटी पुलिस।

नई दिल्ली/अमर भारती। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से लगभग 500 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। हथियारबंद बदमाशों ने देर रात किले में घुसकर सिंधिया राजवंश से जुड़ी बताई जा रही इस ऐतिहासिक तोप को क्रेन और भारी वाहन की मदद से उठा लिया। घटना ने किले की सुरक्षा व्यवस्था और पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चोरी के बाद किले में रखी ऐतिहासिक तोपों की संख्या 14 से घटकर 13 रह गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्रेन और ट्रक के साथ पहुंचे बदमाश

पुलिस के अनुसार, 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश नरवर किले में पिछले रास्ते से दाखिल हुए। उनके पास क्रेन, ट्रक और अन्य भारी उपकरण मौजूद थे, जिनकी मदद से उन्होंने करीब 3000 किलोग्राम वजनी अष्टधातु की तोप को उठाकर वाहन में लाद लिया। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि आरोपियों ने वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया। उन्हें पहले से पता था कि तोप कहां रखी है और उसे हटाने के लिए किस तरह के संसाधनों की जरूरत होगी।

सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर दिया वारदात को अंजाम

घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को बताया कि बदमाश आधुनिक हथियारों से लैस थे। उन्होंने जान से मारने की धमकी देकर सुरक्षा कर्मियों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि किले में पर्याप्त रोशनी, आधुनिक सुरक्षा उपकरण और संचार सुविधाओं का अभाव था। उनके पास केवल लाठियां थीं, जिसके कारण वे हथियारबंद बदमाशों का मुकाबला नहीं कर सके।

पहले भी मिली थीं संदिग्ध गतिविधियों की सूचनाएं

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से करीब 12 दिन पहले भी किले और उसके आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं। इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई विशेष बदलाव नहीं किया गया। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या बदमाशों ने पहले से रेकी की थी और क्या उन्हें किसी स्थानीय व्यक्ति से मदद मिली थी।

क्यों खास है यह ऐतिहासिक तोप?

पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, चोरी हुई तोप 16वीं शताब्दी की मानी जाती है। यह अष्टधातु से निर्मित है और उस दौर की धातु निर्माण तकनीक तथा सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। तोप पर बनी विशेष नक्काशी, शिलालेख और ऐतिहासिक प्रतीक इसे अत्यंत दुर्लभ बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी धरोहरों का ऐतिहासिक महत्व पैसों में नहीं आंका जा सकता, हालांकि अवैध प्राचीन वस्तु बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये तक हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की भूमिका की भी जांच

पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के पीछे ऐतिहासिक और प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने वाला कोई संगठित गिरोह हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ डकैती सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

CCTV और साइबर जांच के जरिए सुराग तलाश रही पुलिस

जांच एजेंसियां किले और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। साथ ही साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि उन संभावित नेटवर्कों का पता लगाया जा सके, जो ऐतिहासिक धरोहरों और एंटीक वस्तुओं की अवैध तस्करी से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

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