लखनऊ: सामाजिक नाटक ‘ब्लैक होल’ का मंचन, पद, पैसा और प्रतिष्ठा की चाह में खो रही नैतिकता

लखनऊ, 8 जनवरी। बच्चों की सही परवरिश की जगह भौतिक सुख और पद प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ में खोये इस पीढ़ी के माता-पिता आज ‘ब्लैक होल’ जैसी गहरी शून्यता की ओर बढ़ रहे हैं, जहां मानवीय नैतिकता और जीवन मूल्यों का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग में बिम्ब सांस्कृतिक समिति के कलाकारों ने संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली की रंगमंडल योजना और भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से राम किशोर नाग के लिखे नाटक ‘ब्लैक होल’ का मंचन महर्षि कपूर के निर्देशन में किया।
नाटक यह संदेश देता है कि सही मार्गदर्शन और संस्कारों के अभाव में युवा संतान अपने लक्ष्य तय करने में असमर्थ होकर भटकाव भरे रास्तों पर हैं। भौतिक सुख और यश की दौड़ में माता-पिता अपने समाज, परिवार और संतान से कटते जा रहे हैं।
कहानी एक बड़ी निजी कम्पनी में अधिकारी कुरु और गृहिणी आशी के इर्द-गिर्द घूमती है। पद, प्रतिष्ठा और पुरस्कार पाने की चाह में आशी अपने बच्चों विभु और त्रिषा पर ध्यान नहीं दे पाती। बेटी त्रिषा घर छोड़ देती है और समाज में खतरनाक परिस्थितियों में फंस जाती है। पुत्र विभु भी प्रेमिका द्वारा तिरस्कृत होने पर अवसाद में हत्या करने का प्रयास करता है। परिवार का हितैषी नौकर भोले काका सभी घटनाओं को देखकर बेहद दुखी है।
भोले काका की बेबाक सलाह कुरु और आशी को उनके स्वार्थ और महत्वाकांक्षा के परिणामों का एहसास कराती है: “पद, पैसा और नाम पाने के चक्कर में अपनी आँखों के तारों से बहुत दूर ब्लैक होल तक चले गए हैं, जहां हमारा अस्तित्व ही गुम हो जायेगा।”
मंच पर भूमिका निभाने वाले कलाकार हैं – अधिकारी कुरु के तौर पर गुरुदत्त पाण्डेय, गृहिणी आशी – रितु श्रीवास्तव, पुत्री त्रिषा – मुस्कान सोनी, पुत्र विभु – आकाश सैनी, नौकर भोले काका – महर्षि कपूर और स्नेही रसिक जी – विवेक रंजन सिंह। मंच निर्माण में सारिका श्रीवास्तव और लकी चौरसिया, मंच सामग्री में आस्था श्रीवास्तव और नेहा चौरसिया, वेशभूषा में अनुकृति श्रीवास्तव, मंच व्यवस्था में मुस्कान सोनी, गीत-संगीत में नियति नाग, प्रकाश संचालन में तमाल बोस, और अन्य सहयोगियों में ऋषि नाग, राकेश कोहली, अम्बुज अग्रवाल, रीता नाग, दक्ष कपूर और राजीव प्रकाश शामिल रहे।
मुख्य अतिथि कर्नल संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ कला समीक्षक राजवीर रतन, डीके मोदी, राजीव प्रकाश और नवल त्रिपाठी उपस्थित रहे। उद्घोषणा नवल शुक्ला ने की।
नाटक ने समाज को चेतावनी दी कि पद, पैसा और प्रतिष्ठा के चक्कर में नैतिक मूल्यों की अनदेखी ब्लैक होल जैसी खालीपन और संकट का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।