अनुभव आधारित चिकित्सा-कर्मियों को चिकित्सा मित्र का दर्जा देने की मांग तेज: नियम 377 के तहत जवाब तलब

लखनऊ। इंडियन रूरल मेडिकोज सोसायटी के चेयरमैन और ऑल इंडिया हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (कम्यूनिटी पैरामेडिक्स) ज्वाइंट एक्शन कमेटी के वाइस चेयरमैन डॉ ओपी मिश्रा ने मंगलवार को जारी एक बयान में तेलगूदेशम पार्टी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि अब सोसायटी की सबसे पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनुभव के आधार पर चिकित्सा कार्य और प्राथमिक उपचार कर रहे लोगों को ‘चिकित्सा मित्र’ घोषित कर उन्हें उपचार का अधिकार देने की मांग उठाई जा रही है, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।

केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात में उठी थी 50 लाख चिकित्सा कर्मियों की मांग

एक्शन कमेटी के वाइस चेयरमैन डॉ ओपी मिश्रा ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के पदाधिकारियों ने केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। इस दौरान देशभर में अनुभव के आधार पर चिकित्सा कार्य कर रहे करीब 50 लाख लोगों को ‘हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स (सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता) के रूप में मान्यता देने की मांग रखी गई थी।

लोकसभा में भी उठा मुद्दा, नियम 377 के तहत जवाब तलब

इस मुलाकात के बाद 30 मार्च को तेलगूदेशम पार्टी के सांसद अप्पल नायडु कलिशेट्टी ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कम्यूनिटी प्राइमरी हेल्थ प्रोवाइडर्स को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की मांग की। इससे पहले 25 मार्च को सांसद अप्पला नायडु ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह भी किया था।

नीतिगत निर्णय की ओर बढ़ता मामला

लगातार राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर उठ रही इस मांग के बाद अब यह मुद्दा नीतिगत निर्णय की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि सरकार इस पर सकारात्मक फैसला लेती है, तो देश के लाखों अनुभव आधारित चिकित्सा कर्मियों को आधिकारिक पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।