चौहद्दी विवाद में आबकारी विभाग घिरा, लाइसेंसी ने डीएम से लगाई गुहार

रिपोर्ट – विनय उपाध्याय

कुशीनगर। जनपद में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पडरौना क्षेत्र में शराब की दुकान के स्थानांतरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में एक लाइसेंसी अनुज्ञापी ने जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए नियमों के उल्लंघन और राजनीतिक दबाव में निर्णय लिए जाने की आशंका जताई है।
पडरौना दुकान संख्या-2 (शॉप आईडी 4890) के अनुज्ञापी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि पडरौना दुकान संख्या-1 (शॉप आईडी 4834) को 1 अप्रैल 2026 से निर्धारित चौहद्दी का उल्लंघन करते हुए उनके क्षेत्र में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि उन्होंने विभाग की नवनीकरण नीति के तहत सभी नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस का नवीनीकरण कराया, लेकिन अब उन्हीं नियमों को दरकिनार कर दूसरे को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
शिकायत में इस पूरे प्रकरण को उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1910 की धारा 60 का उल्लंघन बताया गया है। इस धारा के तहत चौहद्दी का उल्लंघन अवैध माना जाता है और लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग खुद ही अपने नियमों की अनदेखी कर रहा है।
मामले का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि जिस स्थान पर दुकान शिफ्ट किए जाने की बात कही जा रही है, वहां से मंदिर की दूरी मात्र 48.5 मीटर बताई जा रही है, जबकि नियमानुसार कम से कम 75 मीटर की दूरी अनिवार्य है। इससे धार्मिक स्थल से दूरी के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप सामने आया है।
लाइसेंसी का आरोप है कि आबकारी निरीक्षक ने टेलिफोनिक बातचीत में ऊपर से दबाव होने की बात कही है। शिकायत में स्थानीय विधायक के भाई संतोष जायसवाल का नाम लेते हुए कहा गया है कि निजी जमीन पर दुकान शिफ्ट कर किराये का लाभ लेने के लिए यह पूरा प्रयास किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं, तो मामला केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने कुल 78,51,000 रुपये लाइसेंस फीस, 50,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस और 90,000 रुपये नवनीकरण शुल्क जमा किया है। ऐसे में यदि दूसरी दुकान को उसके क्षेत्र में खोला जाता है, तो उसका पूरा निवेश खतरे में पड़ सकता है, जो आर्थिक रूप से गंभीर नुकसान का कारण बनेगा।
लाइसेंसी ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो वह उच्च न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगा। साथ ही उसने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के मानसिक और आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की होगी।
फिलहाल पूरे मामले में जिलाधिकारी की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है या फिर आरोपों के बीच यह मामला और तूल पकड़ता है।