शिक्षा को लेकर ‘मिशन मोड’ में योगी सरकार, 1 मई से शुरू होगा विशेष अभियान

ड्रॉपआउट बालिकाओं को विद्यालय में मिलेगी प्राथमिकता, पहले चरण का अभियान 1 मई-15 मई के बीच शुरू

लखनऊ, 25 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि 6 से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और हर बच्चे का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित हो।

इसी क्रम में 1 मई 2026 से पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत झुग्गी-झोपड़ियों, श्रमिक बस्तियों और ईंट-भट्ठों में रहने वाले ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जो अब तक स्कूल से बाहर हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इन बच्चों को विद्यालयों में नामांकित कर मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की मदद से नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि ड्रॉपआउट बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ को जन आंदोलन बनाकर प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी, बालिकाओं की शिक्षा और ट्रांजिशन दर बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। अभियान के पहले चरण (1 से 15 अप्रैल) में आंगनवाड़ी/बाल वाटिका में छोटे बच्चों का नामांकन, कक्षा-1 में प्रवेश और 7 से 14 वर्ष के ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान शुरू की जा चुकी है। दूसरे चरण में इस प्रक्रिया को और तेज करते हुए छूटे हुए बच्चों तक सीधी पहुंच बनाई जाएगी।

सरकार ने कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100 प्रतिशत ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि कोई भी बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े। साथ ही आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में चयनित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। ‘विद्यांजलि पोर्टल’ के माध्यम से स्कूलों को ऑनबोर्ड कर संसाधनों की कमी का आकलन और उसे दूर करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं व समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।