
लखनऊ। प्रधानमंत्री Narendra Modi और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण संबंधी अपील का असर अब विभिन्न संस्थानों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ स्थित Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University के कुलपति आचार्य संजय सिंह शुक्रवार को साइकिल से विश्वविद्यालय कार्यालय पहुंचे। कुलपति की इस पहल ने विश्वविद्यालय परिसर में सकारात्मक चर्चा को जन्म दिया और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया।
सुबह जब कुलपति आचार्य संजय सिंह साइकिल से विश्वविद्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद शिक्षक, कर्मचारी और छात्र उनकी इस पहल को देखकर प्रभावित नजर आए। कुलपति ने कहा कि देशहित और समाजहित के लिए हमें अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। यदि लोग छोटी दूरी के लिए वाहनों के बजाय साइकिल का उपयोग करें तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
आचार्य संजय सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। बढ़ती ईंधन खपत और प्रदूषण भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व बनता है कि वह ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में अपनी भूमिका निभाए। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे भी सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का संकल्प लें।
कुलपति ने यह भी कहा कि साइकिल का उपयोग केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है और व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय बना रहता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में साइकिल का उपयोग एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
आचार्य संजय सिंह पहले से भी साइकिल चलाने के लिए जाने जाते रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में भी कई बार उन्हें साइकिल से भ्रमण करते देखा गया है। उनकी इस पहल को छात्रों और कर्मचारियों ने प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि यदि उच्च पदों पर बैठे लोग स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से संभव हो सकता है।
कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा, “राष्ट्र निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि हमारी दैनिक आदतों से भी होता है। ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम छोटे-छोटे प्रयासों से शुरुआत करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।”