
कोलकाता: अवैध घुसपैठ के खिलाफ तेज हुआ अभियान
पश्चिम बंगाल में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। राज्य के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रहे हैं। इसी क्रम में पिछले एक सप्ताह के भीतर राज्य में होल्डिंग सेंटरों की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी गई है। इन केंद्रों में फिलहाल 386 ऐसे लोगों को रखा गया है जिनकी नागरिकता और पहचान को लेकर संदेह है। अधिकारियों का कहना है कि सभी व्यक्तियों के दस्तावेजों और पृष्ठभूमि की गहन जांच की जा रही है ताकि उनकी वास्तविक राष्ट्रीयता का सत्यापन किया जा सके।
सीमावर्ती जिलों पर विशेष फोकस
प्रशासन की ओर से सबसे अधिक ध्यान बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों पर केंद्रित किया गया है। विशेष रूप से उत्तरी 24 परगना जिले के बसीरहाट और बनगांव पुलिस क्षेत्रों में निगरानी और जांच अभियान को तेज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन इलाकों में सीमा पार गतिविधियों की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। वर्तमान में बसीरहाट और बनगांव पुलिस जिले मिलकर पांच होल्डिंग सेंटरों का संचालन कर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों को रखा गया है।
एक सप्ताह में तीन नए होल्डिंग सेंटर शुरू
प्रशासन ने पिछले मंगलवार को टेटुलिया, चारघाट और मीडिया क्षेत्र में तीन नए होल्डिंग सेंटर शुरू किए हैं। इन केंद्रों के शुरू होने के बाद राज्य में कुल होल्डिंग सेंटरों की संख्या 11 हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केवल इन तीन नए केंद्रों में ही लगभग 335 लोगों को रखा गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें स्वरूपनगर के हकीमपुर सीमा चौकी के निकट पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये लोग कथित रूप से बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए गए लोगों को मिल रही आवश्यक सुविधाएं
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि होल्डिंग सेंटरों में रखे गए सभी लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें भोजन, चिकित्सा सहायता, स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक सभी लोगों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। साथ ही उनकी पहचान और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जा रही है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी न हो।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
प्रारंभिक जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कुछ लोगों के पास भारतीय पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र पाए गए हैं। हालांकि जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई दस्तावेज कथित रूप से अवैध तरीकों या रिश्वत के माध्यम से प्राप्त किए गए हो सकते हैं। इसी कारण दस्तावेजों की सत्यता की अलग से जांच की जा रही है।
बांग्लादेशी पहचान पत्र भी मिले
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जब कई संदिग्ध लोगों को सीमा पार करने की कोशिश के दौरान पकड़ा गया, तब उनके पास मुख्य रूप से बांग्लादेश द्वारा जारी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज मिले। यही कारण है कि उनकी नागरिकता को लेकर संदेह और गहरा हो गया है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इन लोगों ने भारत में प्रवेश कब और किन परिस्थितियों में किया तथा वे यहां किन गतिविधियों में शामिल रहे।
कई वर्षों से भारत में रह रहे थे कुछ लोग
जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए अधिकांश लोग पांच से दस वर्ष पहले अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर चुके थे। वहीं कुछ लोग ऐसे भी पाए गए हैं जो पिछले सात से आठ महीनों के भीतर ही सीमा पार करके भारत आए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि अवैध घुसपैठ की समस्या केवल पुरानी नहीं है, बल्कि हाल के समय में भी ऐसी गतिविधियां जारी रही हैं।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और नागरिकता संबंधी मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन लोगों की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि हो जाएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।